
रतलाम । शिक्षक की भूमिका बहुआयामी है वह केवल विद्यालय में छात्रों को शिक्षा देने वाला प्राणी मात्र नहीं है अपितु उसकी उपयोगिता छात्र के हर पहलू को विकसित करने में होती है शिक्षा के साथ-साथ उसके जीवन निर्माण में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसलिए वह सेवानिवृत्त नहीं होता है अपने दायित्व से निवृत होता है सेवाओं का क्रम अनंत जारी रहता है ।
उक्त विचार एकीकृत माध्यमिक विद्यालय मलवासा से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक सांस्कृतिक संगठन के सचिव वरिष्ठ शिक्षक दिलीप वर्मा की सेवानिवृत्ति पर आयोजित सम्मान समारोह में प्राचार्य राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त श्री आर.एन.के. रावत ने व्यक्त किए । आपने कहा कि विद्यालय से बाहर भी शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है समाज से उसे कई अपेक्षाएं रहती है । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संकुल प्राचार्य इनामुल शेख ने कहा कि शिक्षक का व्यवहार उसे सदैव सम्मानित करवाता है चाहे विद्यालय में हो या विद्यालय से बाहर उसकी सेवाएं उसका व्यक्तित्व दर्शाती है ।
शिक्षक सांस्कृतिक संगठन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक की भूमिका हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण में भी शिक्षक अहम होता जा रहा है इसलिए शिक्षक की सेवाएं सदैव अनुकरणीय और सम्माननीय रहती है । श्री दिलीप वर्मा अपनी सेवाओं से सर्वत्र लोकप्रिय रहे हैं । शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सर्वेश माथुर, कृष्ण चंद्र ठाकुर, सुल्तान सिंह चंद्रावत, श्याम सुंदर भाटी ने भी अपने विचार व्यक्त किए । आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, अतिथियों का स्वागत शासकीय मावि की प्रधानाध्यापिका, श्रीमती पुष्पा बारोट, श्रीमती खान, सुश्री संगीता नाहर रमेश, कारपेंटर नंदराम परमार, धर्मेंद्र सोनी, परमानंद राठौड़, दिलावर सर, केजाश्री , चंचला व्यास ने किया । इस अवसर पर सर्वश्री विजय यादव, जितेंद्र सिंह चौहान, देवराज गहलोत, गोपाल उपाध्याय, रमेश परमार, रमेश उपाध्याय, शांति लाल भावेल, जन शिक्षकद्वय एवं लेखापाल श्री मईडा जी सहित ग्रामीण जन एवं परिवार के सदस्यगण उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन संगीता नाहर एवं आभार धर्मेंद्र व्यास ने माना।