
जावरा (अभय सुराणा) । दिवाकर भवन पर चातुर्मास हेतु विराजीत मेवाड़ गौरव, प्रखरवक्त्ता, प्रवचनकार रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा. ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि हम सभी भगवान महावीर के शासन में है लेकिन भगवान मेरे भगवान तेरे हैं किस बात का झगड़ा हमारे बीच हमेशा बना रहा है यह तेरे मेरे का झगड़ा मिटाकर हमें एक होना चाहिए। श्रमण संघ में बड़े-बड़े महापुरुष हुए हैं जिसमें जैन दिवाकर पूज्य गुरुदेव चौथमलजी महाराज साहब जैसे संत का सानिध्य में प्राप्त हुआ आपने अपने जीवन में कई बड़े-बड़े चमत्कार किए हैं ऐसे चमत्कार गुरुदेव करते नहीं उनके पुण्य प्रताप से अपने आप हो जाते है ।संसार सागर है और गुरुदेव पार लगाने वाले गुरु के वचन पर कभी भी हमें संदेह नहीं करना चाहिए और ना ही उनके वचनों पर कभी प्रतिकार करना चाहिए। शुद्ध भाव से गोचरी वहराने की भावना से भी तीर्थंकर गोत्र का बंद होता है। गुरु की आज्ञा बिना सवाल जवाब किए पालन करने वाले का कभी भी अहित नहीं होता है हमारा गुरु कौन है तुम्हारा गुरु कौन है हमारे गुरु बडे है तुम्हारे गुरू छोटे है यह झगड़े हमें बंद कर देना चाहिए, गुरु कोई भी हो गुरु के प्रति अहो भाव एवं श्रद्धा भक्ति के भाव रखें। गुरु को कोई नहीं बनाता है गुरु पूर्ण है हम उनको कभी नहीं बना सकते हमें हमेशा यही बोलना चाहिए इस हम उनके शिष्य हैं ।भगवान ने दो धर्म बताए हैं आगार धर्म और अनगार धर्म धर्म को धारण करने की पात्रता चाहिए। मन वचन और काया तीन योग है लेकिन उन को नियंत्रण में रखना भी अपने आप में एक योग क्रिया है।उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिया कार्यवाहक अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने सभी नवकार आराधको से अधिक से अधिक जिनवाणी श्रवण कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है। धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार श्री संघ कोषाध्यक्ष अजय चपडोद ने माना।