रतलाम । कुटुंब प्रबोधन की ओर हमें बढ़ना होगा हम वर्तमान समय में इतने व्यस्त हो गए हैं की परिवार को समय ही नहीं दे पा रहे, घर में एक दूसरे के भाव को नहीं समझ रहे, वचनों को सम्मान नहीं दे रहे हैं, साथ बैठ नहीं, रहे ,ज्ञानवाणी का आदान-प्रदान, बंद हो गया ,सामूहिक धार्मिक गतिविधि नहीं हो रही, क्या यह हमारी गलती नहीं है। गृहस्ती भी एक धर्म है तीर्थंकर भगवान की अंतिम देशना अंतिम वचन के रूप में उत्तरा ध्यान सूत्र के अनुसार जो बहुत ही सारगर्भित है विषय है संयोग परिवारीक सदस्य घर से बाहर निकलता है संयोगवश और किसी से मिलता है, उस से परिचय बढ़ता है, फिर मोह पड़ता है ,आसक्ति होती है उसका चिंतन उसी पर चलने लगता है ,वह दुर्गति की ओर चला जाता है। इन सब के जिम्मेदार हम हैं क्योंकि जीव ऐसा है जो अपने हाल में ही मस्त रहता है ,अगर हम अपने हाल में मस्त रहेंगे तो पारिवारिक सदस्य दूसरी ओर विमुख होंगे हमारे सिद्धांतों से भटकेंगे वह कई ऐसे विषय हमारे सामने आएंगे जो चिंताजनक भी है और भविष्य के लिए खतरनाक भी ,नीतिकार कहते हैं समानात शोभते प्रीति अर्थात समान अवस्था में जो शोभायमान होता है उस से प्रेम करना चाहिए वर्तमान परिस्थिति में देखा जाता है कि हमारी उम्र तजुर्बा आहार समाज सिद्धांत शिक्षा संस्कार सब को ताक पर रखते हुए हम किसी से भी प्रीत लगाए हुए हैं और अंत में परिणाम बुरा ही होगा क्योंकि उसके शिक्षा व संस्कार मैं और हमारे में जमीन आसमान का अंतर होता है इस बात का ध्यान परिवार के वरिष्ठो को रखने की जरूरत है व युवा भी घर के बड़ों से अपने पल-पल के अनुभव आदान प्रदान करें तो ही सुखी परिवार बन पाएगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि चरित्र आत्माओं की निश्रा में तपस्या ओं का ठाठ है जिसमें आठ उपवास से अधिक वाले सुशील गोरेचा ,अनोखीलाल पीरोदिया ,मनीषा कांठेड़ ,सुशीला बाफना ,संदीप पीरोदिया ,सपना पीरोदिया ,शुभ घोटा, निर्मला मुरार, हर्ष कटारिया ,आशीष छाजेड़ ,सपना मूणत ,पूर्णिमा मूणत ,आदि और भी श्रावक श्राविकाओ के समता भवन नोलाईपुरा पर गुप्त तपस्या चल रही हे। इस अवसर पर सभा का संचालन संघ अध्यक्ष सुदर्शन पीरोदिया व मंत्री दशरथ बाफना ने किया।