अहंकारी व्यक्ति इस संसार में कभी यश प्राप्त नही कर सकता और न ही सुखी रह सकता है – पूज्य गुरुदेव अरुणमुनि जी

रतलाम। व्यक्ति के चारों और सुख के साधन बिखरे हो, जब मनुष्य के भीतर त्याग की भावना बहुत मुश्किल से आती है। कुछ विरले हलुकर्मी ही संसार में रहते हुए भी संसार से विरक्त रहने का साहस करते है।
गौतम स्वामी ने प्रभु महावीर से प्रश्न पूछा की व्यक्ति अपने जीवन में अनेक कष्टों को प्राप्त करता है इसका क्या कारण है । प्रभु ने फरमाया की जिस व्यक्ति के अंदर अहंकार की भावना रहती है वह हमेशा परेशानियों और दुःखों से घिरा रहता है ।
अहंकार से वशीभूत व्यक्ति अपने आप को अहम ब्रह्म्म मानकर चाहता है की घर परिवार में, समाज में सभी व्यक्ति मेरी ही बात सुने। जिस व्यक्ति के मन में अहंकार होता है उसके भीतर विनम्रता नही रहती है। वह सामने वाले को हमेशा अपने से तुच्छ समझने की भूल करता है। जिस प्रकार गर्दन में चसक आ जाए तो गर्दन झुकाने पर बहुत दर्द होता है, वैसे ही अहंकारी व्यक्ति गर्दन झुकाने में दर्द महसूस करता है।
अहंकारी व्यक्ति इस संसार में कभी यश प्राप्त नही कर सकता और न ही सुखी रह सकता है। एक दृष्टांत देते हुए पूज्य गुरुदेव अरुणमुनि ने समझाया की एक अहंकारी और जिद्दी व्यक्ति ने भरी सभा में साधु को परेशान करने के लिये प्रश्न किया की व्यक्ति नर्कगति में किस कारण जाता है, सन्त ने बताया की व्यक्ति काम क्रोध और लोभ की वजह से नर्क में जाता है । सन्त के जवाब से व्यक्ति जानबूझ कर सन्त को परेशान करने के लिये बोलता है की समझ नही आया ये तो सभी बोलते है आप कोई नई बात बताओ तब सन्त ने कहा की असत्य बोलने वाला नर्क में जाता है। फिर भी वो असंतुष्ट। सन्त ने सभी धर्म ग्रन्थों के हवाले से उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन वो समझने को तैयार नही था।
लोगो ने सन्त के गुरुदेव के पास बात पँहुचाई, गुरुदेव आए और उचित आसन पर बैठे और पूछा की नर्क जाने का कारण कौन पूछ रहा है। सभा में से उस व्यक्ति ने कहा की मैं पूछ रहा हूँ। तो गुरुदेव ने कहा बस ये जो मैं है वो ही नर्क का सबसे बड़ा कारण है। जँहा मैं आ जाता है वँहा अहंकार आ जाता है और अहंकारी व्यक्ति नर्क में जाता है। शास्त्रों में अहंकार के बहुत दुष्परिणाम बताए गए है, सनत चक्रवती को अपने रूप पर बहुत अहंकार था बाद में उसका पूरा शरीर रोगों का घर बन गया।
आगम पर आधारित यह प्रवचन पूज्य गुरुदेव श्री अरुणमुनि जी मसा ने नीमचौक स्थानक की धर्मसभा में प्रदान किये।
महामन्त्री विनोद बाफना ने बताया की तेले की लड़ी के अंतर्गत राजकुमारी पोखरना के तेले का बहुमान शिल्पा झामर द्वारा किया गया। अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया की दिनाँक 15 जुलाई शनिवार को पूज्य गुरुदेव श्री केवलमुनि मसा की जयंती तप त्याग तपस्या के साथ मनाई जाएगी। जिसमें 5-5 सामायिक के साथ सामूहिक दया का आयोजन किया जाएगा।