रतलाम। विचार व्यक्ति के जितने निर्मल होंगे आहर इतना स्वादिष्ट और प्रिय लगेगा आहर रसना का केंद्र है हम अगर उसके प्रति भाव बना ले कि यह बहुत मीठा है तो वह हमें मीठा ही लगेगा कड़वे का भाव बनाएंगे तो कड़वा लगेगा यह मनोवृति है उसी प्रकार उदाहरण स्वरूप बीमार व्यक्ति को अगर कहा जाए कि अब तुम पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हो उसे संतुष्टि दिलाई जाए तो वह भी स्वस्थ हो जाता है क्योंकि विचारधारा भावो से बनती है शुद्ध विचारधारा के लिए हमें सात्विक भोजन के साथ साथ धार्मिक स्थलों पर जाना सुसंगत में रहना सत्कार्य करना जरूरी है जो तुम धर्म गुरु के बिना नहीं मिल सकती बाल्य काल से ही संस्कारों का बीजारोपण ठीक हो तो वह सही संगत शुद्ध आहार उत्तम समाज निर्माण की चेष्ठा रखता है ।वर्तमान युवा पीढ़ी पर चिंता जताते हुए महिमा महोत्सव के अंतर्गत चरित्र आत्माओं ने फरमाया कि जिस प्रकार नशे में लिप्त युवा बच्चे हो रहे हैं वह भविष्य के लिए घातक है परिवार को नष्ट करने जैसा है परिवारों के वरिष्ठ को चिंता करनी होगी युवाओं को दुर्गति की ओर जाने से रोकना होगा उन्हें वात्सल्य प्रेम के साथ समझाना होगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि रविवार को 7 वर्षों से बड़े बच्चों के लिए बाल दर्शन शिविर का आयोजन रखा गया है। जिसमें 25 साल तक की युवा भी भाग ले सकेंगे श्री संघ के अध्यक्ष श्री सुदर्शन पिरोदिया ने संघ के सदस्यों से आह्वान किया के शिविर में अधिक से अधिक संख्या में बच्चों युवाओं को भेजें। सभा का संचालन मंत्री दशरथ बाफना ने किया।