जावरा (अभय सुराणा) । धर्म से हमें जुड़े रहना चाहिए।धर्म हमें निर्लज होने से बचाता है। जब हम निर्लज हो जाते हैं तो हमारा डर समाप्त हो जाता है और डर समाप्त हो जाने पर हम धर्म मार्ग से भटक जाते है डर खत्म होने से हमें पाप पुण्य का ज्ञान नहीं रहता है मनुष्य स्वच्छंद रहने की सोचने लगता है। जिस प्रकार पेड़ से पत्ता टूटा तो वह सोचता है कि मैं आज़ाद हो गया परन्तु वह अपने पतन की ओर बढ़ जाता है धीरे धीरे वह सूखने लगता हवा पानी का प्रभाव नहीं रहने से अन्त में उसका वजूद खत्म हो जाता है इसी प्रकार की समाज परिवार से दूर रहने का व्यक्ति सोचता जरूर है वह सोचता है हम सुखी रहेंगे आजाद रहेंगे किंतु वह अपने पतन के मतग पर जा रहा है। घर परिवार, समाज में बुजुर्गों की इज्जत करना चाहती उनकी उपयोगिता हमें लेना चाहिए वो हमारे परिवार, समाज के सरताज है उनका अनुभव उम्र एवं ताकत से कई गुना हम बड़ा है।इसलिए हमें कहीं भी कोई अपने से बड़ा व्यक्ति मिले तो उसे नमस्कार जरूर करना चाहिए। उपरोक्त कथन दिवाकर भवन पर विराजित मेवाड़ गौरव प्रखर वक्ता कुछ गुरुदेव रवींद्र मुनिजी महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए आपने फरमाया की हम अपनी आजादी, विलासिता, सुख।का उपयोग करने के लिये घर परिवार समाज छोड़ रहे हैं। यह बिखराव हमारी आज की बहुत बड़ी ज्वलंत समस्या है।हर परिवार में माता, पिता, भाई, बहन, सास, ससुर की बातें नहीं सुनने वाला व्यक्ति लोगों की बातें सुनता है । उपरोक्त जानकारी देते हूए श्रीसंघ अध्यक्ष इन्दरमल टुकड़ियां, कार्य अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने बताया की उपाध्याय प्रवर कवी रत्न पूज्य गुरुदेव केवलमुनि जी म.सा. की ११० वी जन्मजयन्ती गुणानुवाद सभा के रूप में मनाई गई चातुर्मास विभिन धार्मिक गतिविधियों एवम जप तप धर्म आराधना के साथ गतिमान है इसी क्रम में ताल निवासी प्रकाशचंद जी पितलिया ने पूज्य गुरुदेव के मुखारविंद से १३ उपवास के प्रत्याख्यान लिये प्रभावना का लाभ श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ने लिया धर्मं सभा का संचालन सहमंत्री यश जैन छाजेड़ ने किया आभार श्रीसंघ उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।