लोभ पर विजय प्राप्त करना है तो सन्तोष धारण करना होगा, संतोषी सदा सुखी – पूज्य गुरुदेव श्री अरुणमुनि जी म.सा.

रतलाम। आवश्यकता की पूर्ति सम्भव है लेकिन आकांक्षा की पूर्ति असम्भव है। व्यक्ति अपनी इच्छाओं को जितना संक्षिप्त करने का प्रयास करेगा, उतना वो सुखी होता जाएगा।
भगवान महावीर ने चार कषायों के बारे में बताया की क्रोध प्रीति को नष्ट कर देता है, मान (अहंकार) से विनम्रता का नाश होता है, माया से मित्रता का नाश होता है लेकिन लोभ से तो समस्त अच्छाइयों का नाश हो जाता है।
लोभ बहुत हानिकारक है एंव समस्त बुराईयों की जड़ है। लोभ पर विजय प्राप्त करना है तो सन्तोष धारण करना होगा, संतोषी सदा सुखी । उत्तराध्ययन सूत्र के 29वें अध्याय में गौतम स्वामी ने प्रभु महावीर से पूछा की लोभ पर विजय प्राप्त करने का क्या फल है, तब प्रभु ने फरमाया की लोभ पर विजय प्राप्त करने से आत्म संतुष्टि की प्राप्ति होती है। लालसा ऐसी लालसी प्रवृत्ति है जिसका कोई अंत नही है।