प्रभु भक्ति, गुरू कृपा और आत्म विश्वास.. असम्भव को भी सम्भव करा सकता है.. – अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज

कोडरमा/औरंगाबाद। उदगाव- भारत गौरव साधना महोदधि सिंहनिष्कड़ित व्रत कर्ता अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का महाराष्ट्र के ऊदगाव मे 2023 का ऐतिहासिक चौमासा चल रहा है इस दौरान अपने प्रवचन में कहा की
प्रभु भक्ति, गुरू कृपा और आत्म विश्वास..असम्भव को भी सम्भव करा सकता है..!
किसी भी लक्ष्य को पाने के लिये ये तीन कार्य बहुत मायने रखते हैं-
प्रभु भक्ति से शक्ति,
गुरू कृपा से दिशा, और
आत्म विश्वास से सफलता चरणों की दासी बन जाती है।
ध्यान रखना! प्रभु और गुरू जानने की नहीं, मानने की चीज है। यदि आप प्रभु भक्त और गुरू के शिष्य हैं, तो एक बात अपने जहन में बसा लें – गुरू कृपा और प्रभु भक्ति से हम अपने लक्ष्य को सहजता से प्राप्त कर सकते हैं।
मीरा सी भक्ति, एकलव्य सा समर्पण जब अन्तर्मन में उपजता है तो श्रद्धा का फूल विश्वास की हवा को कभी खिरने नहीं देता। जो गैर जिम्मेदार है, वह ना समर्पण कर सकते और ना कुछ प्राप्त कर सकते, क्योंकि समर्पण और श्रद्धा ही आत्म निर्भर और आत्म विश्वास को पैदा करती है।जैसे 100 रूपये में 50 रूपये निहित है, वैसे ही आत्म विश्वास में निडरता और आत्म निर्भरता निहित है। यदि आपके पास सौ रूपये नहीं है तो हजार भी नहीं होंगे। इसी प्रकार जिनको अपनी श्रद्धा-भक्ति, आत्म विश्वास पर डाऊट है, वे लोग कभी — ना सफल हो सकते, ना आत्म निर्भर।
समर्पण का अर्थ है —
साहिल भी तू है, किनारा भी तू है। पार करना या डूबोना सब तेरे हाथ में है…! पियूष कासलीवाल, नरेद्र अजमेरा औरंगाबाद, राजकुमार जैन अजमेरा कोडरमा मीडिया ने उक्त जानकारी दी।