

जावरा (अभय सुराणा) । दिवाकर भवन पर जप तप आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधीयो के साथ पाँच माह का चातुर्मास गतिमान है। प्रतिदिन नवकार आराधक श्रावक श्राविकाओ के साथ ज्ञान जिज्ञासु महानुभव प्रवचनो के माध्यम से जिनवाणी का श्रवण कर रहे है। प्रवचनो के माध्यम से प्रखर वक्ता मेवाड़ गोरव पुज्यश्री रविन्द्रमुनि जी म सा व्यवहारिक एवं सासांरिक जीवन का आईना दिखाते हुए जीवन जीने का वास्तविक तरीका बता रहै है। प्रवचन की श्रृखंला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि हम वर्तमान मे राम, कृष्ण, महावीर से दुर होते जा रहै है हम उन्हे पुजते है लेकिन उनके द्वारा सीखाये मार्ग पर चलने पर हमे कठिनाई महसुस होती है उनके द्वारा सिखाये सिद्धांतो को हम भुला रहे है। मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु राम पिता के वचन का पालन करते हुए जब वनवासी जीवन व्यतित कर रहे उस समय माता सीता का रावण द्वारा हरण किया गया था तब उस घने जंगल में एक अबला नारी की पुकार सुन निहत्थे पक्षीराज गरुड़ ने महाबली महापराक्रमी रावण से प्रतिकार करने में विचार भी नहीं किया उनके इस निष्काम कर्म ने उन्हें इतिहास में अमर बना दिया लेकिन हम आज किसी अबला की चीख-पुकार पर हम मूक दर्शक बने देखते रहते हैं क्या यही हमारे संस्कार हैं।परिवार छोड़ने पर भी प्रभु नहीं रोए माता सीता के हरण पर भी प्रभु ने अपने अश्रु नहीं बहाये लेकिन जब गरूड़ के मरणासन्न अवस्था पर उसे अपनी गोद में प्रभु ने लिया तब उनके अश्रु बह निकले क्योंकि भगवान जानते थे पक्षीराज ने निष्काम भाव से अपनी भक्ति का परिचय दिया है। उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिया कार्यवाहक अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने बताया की ताल निवासी प्रकाशचंद्र जी पितलीया ने 15 उपवास के प्रत्याख्यान गुरुदेव से लिये।धर्मसभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार श्रीसंघ उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।