



रतलाम, 18 जुलाई। ईश्वर ने इतने सुंदर जगत की रचना की है, तो इसमें हमें जीना कैसे है, यह भी सीखना चाहिए। जीवन जीने के तीन स्टैंडर्ड है- लीविंग, चैटिंग और थिकिंग। तीनों स्टैंडर्ड को आत्मसात करके ही जीना है। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने कही। सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में आयोजित प्रवचन के दौरान उन्होने जीने का तरीके पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य श्री ने कहा कि हमारे मरने के बाद कोई हमे याद करे ऐसी जिंदगी जीना है। हमारे होने पर किसी को हमसे कोई शिकायत नहीं होना चाहिए। आवृत्ति के क्षेत्र में हम बहुत आगे है लेकिन प्रकृति के क्षेत्र में बहुत पीछे है। आवृत्ति का वैभव है, पर प्रकृति का वैभव बनाना है। धर्म केवल क्रियात्मक नहीं, वियात्मक भी होता है।
उन्होने कहा कि जब हम बोलते है तो हमारा व्यवहार झलकता है। इससे ही मन का परिचय पता चलता है। इसलिए बोलने का व्यवहार अच्छा होना चाहिए। इसी प्रकार हमे बड़ी सोच मिले, मकान, दुकान नहीं भगवान से यह वंदन करना है। हमारा मन स्वार्थी सोच का है, तो इसे बदलना है। सोच से दूरी पैदा होती है। जैसे की सास-बहु, पिता-पुत्र, पौते-दादा के बीच की दूरी सोच की है।
आचार्य श्री ने सबसे लीविंग, चैटिंग और थिकिंग का ध्यान रखने का आव्हान किया। इस दौरान श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी रतलाम के सदस्य एवं बढ़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। अंत में आचार्य श्री ने सबको महामांगलिक श्रवण कराई।
बुधवार को होगी भव्य गुणानुवाद सभा
युगप्रभावक आचार्य देव श्री भुवनभानु सूरीश्वरजी म.सा. के समुदाय के पूज्य मालव भूषण आचार्य देव श्री वीररत्न सूरीश्वरजी म.सा. की भव्य गुणानुवाद सभा 19 जुलाई को आयोजित होगी। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में प्रातः 9.15 से 10.15 बजे होने वाली इस सभा में श्री संघ ने सकल जैन श्री संघ से उपस्थित रहने का आव्हान किया है।