रतलाम 18 जुलाई – विनय धर्म से मनुष्य की बुद्धि निर्मल होती है। जित्तनी सहजता, सरलता, विनम्रता बढ़ती है उतनी बुद्धि निर्मल होती है। वैष्णव धर्म में बताया गया है की दया की धर्म का मूल है, परन्तु भगवान महावीर ने विनय को धर्म का मूल बताया है। दान मनुष्य के जीवन के हजारों पापों को नष्ट कर देता है, लेकिन विनम्रता से भवों भवों के पाप नष्ट हो जाते है। उत्तराध्ययन सूत्र में विनय धर्म की व्याख्या करते हुए प्रभु ने फरमाया की गुरु के प्रति विनय धर्म के 5 सूत्र है।
पहला गुरु को दूर से आता हुआ देखकर अपने स्थान से खड़े हो जाना चाहिए। दूसरा गुरु को दूर से देखते ही हाथ जोड़कर नमस्कार करे। तीसरा अपना आसन छोड़कर गुरु को उचित आसन प्रदान करे। चौथा गुरु प्रति मन में आस्था एंव भक्ति रखना। पाँचवा गुरु की आज्ञा और आदेश का पालन करना, गुरु आज्ञा में ही चलना ।