

रतलाम। गुरु का मतलब अंधकार को दूर करके प्रकाश की ओर जाने वाले वह गुरु है। जो अज्ञानता का निवारण करने में समर्थ हों अथवा गुरु वह है जो धर्म का मार्ग दिखाएं, यदि हम थोड़ी समझ रखकर गुरू का सानिध्य प्राप्त कर लेंगे तो हम गुरु कृपा से हम संसार सागर को पार करने में समर्थ हो पायेगे। लेकिन समय निकल गया और हमने गुरु शरण नहीं ली तो लाखों रुपए देकर भी हमें वह नहीं प्राप्त होगा जो मैं सदगुरू की कृपा से मिलता है। उक्त बात ब्रह्मर्षी श्री हेमंत जी कश्यप ने बिरिया खेड़ी स्थित सिंधी गुरुद्वारा में गुरु भक्त परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस धर्मालुजनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के प्रारम्भ में आशापुरा माताजी बिरिया खेड़ी से भव्य कलश एवं भागवत पोथी यात्रा धूमधाम से निकाली गई । जिसमे महिलाएं बैंड की धुन पर नृत्य करते हुए 51 कलश सिर पर लिए हुए विभिन्न मार्गो से होते हुए कथा स्थल सिंधी गुरुद्वारा पहुंची।
गुरु भक्त परिवार के शैलेंद्र सिंह देवड़ा ने बताया कि कथा के प्रारम्भ में विभिन्न संस्थाओं द्वारा गुरु हेमंत कश्यप जी का स्वागत किया गया जिसमें श्री महाराणा प्रताप जन्म उत्सव समिति के पदाधिकारी गण, श्री चारभुजा नाथ ट्रस्ट के पदाधिकारीगण, श्री राजपूत नवयुवक मंडल एवं न्यास के पदाधिकारी गण, करणी सेना परिवार, वीर क्षत्राणी शक्ति एवं श्री करणी सेना मूल आदि ने गुरु श्री कश्यप जी का स्वागत-सम्मान किया। पश्चात पोथी पूजन गुरु भक्त परिवार के तेज सिंह चौहान, मांगू सिंह राठौर, सज्जन सिंह राठौर, गोवर्धन सिंह राठौर, अशोक सिंह सोलंकी व परिवार द्वारा श्रीमद् भागवत पोथी का पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर यशवंत सिंह पवार, विजय सिंह चौहान, शैलेंद्र सिंह देवड़ा, विशाल सिंह सोलंकी, मयूर सिंह, प्रहलाद सिंह चौहान, योगेंद्र सिंह राठौर एवं बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे ।