नेतृत्व जितना ऊर्जावान, जुझारू, कर्मठ और ज्ञानवान होगा उतना खुद का तो निर्माण करेगा ही उस जाति, देश का भविष्य उज्जवल करेगा- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

जोधपुर । नेतृत्व जितना ऊर्जावान जुझारू कर्मठ और ज्ञानवान होगा उतना खुद का तो निर्माण करेगा ही उस जाति देश और कौम का भविष्य उज्जवल करेगा । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने महावीर भवन नेहरू पार्क में चर्चा के दौरान कहा कि नेतृत्व के गुण किसी किसी में पाए जाते हैं वह भी चरित्रवान हो फिर तो सोने में सुहागा होगा । उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति गलती करता है तो उसी का नुकसान होता है लेकिन नेतृत्व जब गलती करता है स्वयं का तो नुकसान होता ही है साथी साथ वालों को भी अंधकार की गलियों में भटका देता है । मुनि कमलेश ने बताया कि नेतृत्व में वर्चस्व की लड़ाई अत्यंत घातक होती है विवेक का दीपक बुझ जाता है विकास के बजाय पतन शुरू हो जाता है। राष्ट्रसंत स्पष्ट कहा कि नेतृत्व की भूख अग्नि में घी डालने के समान है वह कभी समाप्त नहीं होती उसमें नेतृत्व जलकर स्वाहा हो जाता है इससे खतरनाक अपना नुकसान और कोई नहीं कर सकता जैन संत ने बताया की एक नेतृत्व अमरबेल की भांति होता है स्वयं का पोषण कर के पेड़ को सुखा देता है । इसी प्रकार अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए दूसरों को उजाड़ देता है दूसरा नेतृत्व नींव के पत्थर की भांति होता है जो खुद की मान और अपमान की परवाह न करते हुए नुकसान उठा कर दूसरों के निर्माण का काम करता है वह धरती पर चलता फिरता देवता के समान है कौशल मुनि जी ने मंगलाचरण किया अक्षय मुनि जी ने विचार व्यक्त किए ।

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