छोटू भाई की बगीची में हुआ महान विभुति संगम
रतलाम,22 जुलाई। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त क्रांति जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में अभ्युदय चातुर्मास के दौरान शनिवार को छोटू भाई की बगीची में महान विभुति संगम हुआ। इसमें आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा एवं पूज्य गणिवर्य श्री कल्याणरत्न विजयजी मसा के अदभुत प्रवचन हुए। आचार्यश्री ने कहा कि दो भाई मिलते है, तो मां प्रसन्न होती है, दो पडौसी मिलते है, तो पूरा मोहल्ला प्रसन्न हो जाता है, लेकिन दो परंपरा के संत जब मिलकर प्रवचन देते है, तो तीनों लोक प्रसन्न हो जाते है। गणिवर्य श्री ने कहा ज्ञान, दर्शन, चारित्र में अनंत सुख है, ये सोचोगे, तभी सबका अभ्युदय होगा।
क्यों नहीं करते ? अनंत यात्रा की तैयारी -गणिवर्यश्री
पूज्य गणिवर्य श्री कल्याणरत्न विजयजी मसा के अनुसार आपको दो दिन के लिए भी कहीं बाहर जाना होता है, तो तैयारी करके जाते हो, फिर अनंत यात्रा की जाने की तैयारी क्यों नहीं करते। व्यक्ति सपने में चक्रवर्ती बन जाए, तो उसे आकर्षण नहीं होता, क्योंकि आंख खुलते ही सब गायब हो जाता है। जब आंख खुलते ही गायब होने वाले का आकर्षण नहीं, तो जो आंख बंद होते ही गायब हो जाएगा, उसका इतना आकर्षण क्यों है? उन्होंने कहा कि सबको अपने दुख और उसका कारण पता होना चाहिए। दुख किसी के परेशान करने से होता है अथवा उस पर क्रोध आने से होता है। कोई आगे निकल रहा है, उससे दुख होता है या उससे ईष्र्या होती है, इसलिए दुख होता है। दरअसल सारे दुखों में मूल में हमारे दोष होते है। दोष निकल जाएंगे, तो सब ठीक हो जाएगा। दोष दूर करने के लिए सम्यक ज्ञान, दर्शन और चारित्र की शरण में जाना चाहिए। डाक्टर बोलेंगे-शरीर है, तो सबकुछ है, लेकिन परमात्मा कहते है-आत्मा है, तो सबकुछ है। एक रोग को दूर करने के लिए हमे कितने सरेंडर होते है, तो फिर अनंत रोगों को दूर करने के लिए सरेंडर क्यों नहीं होते। ज्ञान, दर्शन और चारित्र में जितना सुख है, उतना कहीं नहीं है।
जीवन को सार्थक करना हो, तो सत्य से जुडो-आचार्यश्री
परम पूज्य प्रज्ञा निधि युगपुरूष आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कहा कि वर्तमान में झूठ-कपट का बोलबाला है, लेकिन ये किस काम के है? कोरोना काल ने सबकों सबक दिया कि सबकुछ यहीं छूट जाने वाला है, फिर भी झूठ और कपट का असर कम नहीं हो रहा है। आज संसार में जितनी अहिंसा की जरूरत है, उतनी ही सत्य की भी है। सत्य और अहिंसा एक दूसरे के पूरक है, इसीलिए सत्यजीवी कभी हिंसा नहीं करता और अहिसंक कभी असत्य का साथ नहीं देता। सत्य में वीरत्व लगता है। उसके प्रति निष्ठा पैदा करो, क्योंकि सत्य कभी मिटता नहीं है और असत्य कभी टिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्य की पूजा सबकों करना चाहिए। जीवन को सार्थक करने में सत्य सहायक है। इसलिए सत्य के प्रति आस्था होगी, तो वो शक्ति मिलेगी, जो जीवन का सार्थक करने में सहायक होगी। आचार्यश्री ने कहा कि अनैतिकता से बचो और नैतिकता के मार्ग पर चलकर सत्य की प्रतिष्ठा करो। इससे जीवन सार्थक हो जाएगा। आरंभ में उपाध्याय, प्रज्ञारत्न श्री जितेश मुनिजी मसा ने संयम का आदर करने का आव्हान किया। इस दौरान बडी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।