तन, धन, यौवन और जीवन की कोई गारंटी नहीं- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

रतलाम, 3 अगस्त। जगत में सभी चीजें परिवर्तनशील है। दुख नहीं चाहिए तो आप सुख को छोड़ दो। अमीरी से बचे तो गरीबी नहीं आएगी। जीवन में चार चीज तन, धन, यौवन और जीवन की कोई गारंटी नहीं है। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने मोहन टॉकीज सैलाना वालों की हवेली में गुरुवार को प्रवचन में कहीं।
आचार्य श्री ने कहा कि हमारी काया का कोई भरोसा नहीं है। हमारे तन की कोई गारंटी नहीं दे सकता है। इसकी एक्सपायरी है। यदि हम यह जान ले तो हमे इससे कोई मोह नहीं रहेगा। कहीं शिखर होता है तो समझ लेना कहीं गड्ढा भी होगा। जिस प्रकार से समुद्र की लहर चंचल होती है, धन भी वैसा ही है, जो पत्ते पेड़ के हैं, वह पतझड़ में पेड़ नहीं रहते हैं। धन भी ऐसा ही है, आज है तो कल नहीं।
आचार्य श्री ने कहा कि आज आप अभी चाहे जितना भाग-दौड़ सकते हो लेकिन जब यौवन जाएगा तो कुछ नहीं कर पाओगे। इस संसार में कुछ भी नहीं मिलने वाला है। हमें अंत से बचना है या आरंभ से यह स्वयं को तय करना है। अनपढ़ को पता है बालक को मां से अलग नहीं करना चाहिए लेकिन हम पढ़ लिखकर बच्चों को यह नहीं समझा पा रहे हैं। हम घर में भी बच्चों से मातृ भाषा की बजाय अंग्रेजी में बात करते हैं। इसलिए जीवन को अच्छी तरह से जीने का प्रयास करें।
इस दौरान श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।