धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी के दर्शनार्थ सूरत के लिए तीन दिवसीय दर्शन यात्रा निकाली

  • प्रवर्तकश्री ने जीवन को सार्थक करने हेतु प्रेरक उपदेश दिया
  • 50 दर्शनार्थियों ने यात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल होकर प्रवर्तकश्री के मुखारविंद से लिए विभिन्न प्रत्याख्यान

रतलाम 11 अगस्त । व्यक्तिगत या पारिवारिक दर्शन यात्रा निकालना बहुत आसान कार्य हैं। लेकिन जिसकी पुन्यवानी प्रबल होती हैं ऐसे सामाजिक या समूह रूप में अपने सौजन्य से दर्शन यात्रा निकालने वाले विरले ही पुण्यवान व्यक्तित्व मिलते हैं। इसी के अंतर्गत गुजरात के सूरत शहर में विराजित आचार्यश्री उमेशमुनिजी के शिष्य एवं धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी, तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी, अतिशयमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, सुहासमुनिजी, सुलभमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, जिनांशमुनिजी ठाणा 8 के दर्शनार्थ रतलाम से दर्शन यात्रा निकाली।
प्रवर्तकश्री के बाल सखा प्रस्फुटित हो गए
उक्त दर्शन यात्रा संघ के लाभार्थी प्रवर्तकश्री के सांसारिक बाल सखा, समाजसेवी, पारणा समिति एवं संयमी आत्माओं की वैयावच्च में सदैव अग्रणी रहने वाले प्रकाशचंद्र नांदेचा थे। दर्शन यात्रा निकालकर नांदेचा बाल सखा का धर्म निभाकर प्रस्फुटित हो गए। रतलाम रेलवे स्टेशन पर यात्रा के लाभार्थी श्रीनांदेचा ने प्रत्येक दर्शनार्थी को तिलक लगाकर माला, मुख वस्त्रिका एवं मुख वस्त्रिका कवर भेंट किया।
यात्रा के लाभार्थी श्रीनांदेचा का किया बहुमान
जितेंद्र किरण मालू प्रतापगढ़, अनूप रेणु घोड़ावत झाबुआ, कमलेश आरती पटवा बदनावर एवं कांतिलाल लोढ़ा ने श्री नांदेचा का बहुमान कर दर्शनार्थियों की संघ पूजा कर भेंट दी। वहीं कांतिलाल कटारिया, जयंतीलाल जैन, दिलीप गेलड़ा, अरविंद मेहता, मनोज लोढ़ा, प्रमोद बाठिया, राजेश गादिया ने श्री नांदेचा का बहुमान किया।
जयकारे के साथ हुई यात्रा प्रारंभ
आराध्य प्रभु श्रमण भगवान महावीर स्वामी, आचार्य उमेशमुनिजी, आचार्य नानेश – रामेश, प्रवर्तकश्री आदि जयकारे के साथ ट्रेन द्वारा रतलाम से यात्रा प्रारंभ हुई। यह यात्रा धार्मिक एवं उत्साहपूर्वक वातावरण में सूरत शहर पहुंची। वहां विराजित प्रवर्तकश्री एवं संत वृंद के दर्शन, वंदन, मांगलिक, व्याख्यान, ध्यान मांगलिक, वाचनी श्रवण, प्रतिक्रमण, ज्ञान चर्चा आदि का दो दिन लाभ लिया। वहां तपस्वी आत्माओं के तप एवं विभिन्न आराधकों की अनुमोदना कर साधुवाद दिया। यहां प्रवर्तकश्री ने व्याख्यान के दौरान जिनवाणी के माध्यम से जीवन को सफल एवं सार्थक करने हेतु आत्मसात करने के कई प्रेरक उपदेश दिए। सूरत श्रीसंघ ने यात्रा के लाभार्थी श्रीनांदेचा की खूब अनुमोदना की।
प्रवर्तकश्री के चरणों में बाल सखा सुदामा के रूप में पहुंचे
धर्मसभा में धर्मदास जैन श्रीसंघ रतलाम के परामर्शदाता एवं पूर्व अध्यक्ष अरविंद मेहता ने विचार व्यक्त कर दर्शन यात्रा के लाभार्थी की अनुमोदना करते हुए कहा कि पुण्यवानी होती तब कहीं जाकर दर्शन यात्रा निकालने का लाभ मिलता हैं। समाजसेवी प्रकाशचंद्र नांदेचा यह यात्रा निकालकर एक अनुपम पुण्य अर्जित करते हुए सुदामा के रूप में यहां पहुंचे। इनकी जितनी भी अनुमोदना करे कम होगी।
पूर्व में भी दर्शन यात्रा निकाली
प्रवर्तकश्री के प्रति बाल सखा के रूप में अटूट श्रद्धा रखने वाले श्रीनांदेचा द्वारा इस तरह की यात्राएं पूर्व में भी दाहोद, मेघनगर, पेटलावद, खाचरौद, झाबुआ आदि स्थानों पर प्रवर्तकश्री के चातुर्मास के दौरान निकाली गई हैं। स्मरण रहे एक तरफ कोरोना काल से हर कोई भयभीत था। वहीं श्रीनांदेचा ने ऐसे भयावह कोरोना कॉल में भी लोगों की निः स्वार्थ भाव से निः संकोच, निर्भीक होकर अविस्मरणीय, अतुलनीय, अनुकरणीय सेवा की।
संयमी आत्माओं का दर्शन लाभ लिया
इधर आचार्यश्री विजयरत्न सुंदरसूरीश्वरजी आदि ठाणा के दर्शन के बाद मांगलिक श्रवण कर वास्क्षेप डलवाई। उधर आचार्यश्री रामलालजी ‘रामेश’ की आज्ञानुवर्तिनी शासन दीपिका उज्ज्वलप्रभाजी आदि ठाणा के दर्शन, मांगलिक आदि का लाभ लिया। यहां साध्वीश्री ने ज्ञान चर्चा में प्रेरणा स्वरूप जीवन में आचरणित करने योग्य अन्तर्हृदय को छूने वाले कई तत्व ज्ञान पर विस्तृत प्रकाश डाला एवं किसी की हंसी उड़ाने व मिमिक्री नहीं करने की मुख्य रूप से प्रेरणा दी।
दर्शनार्थियों के प्रति की कृतज्ञता व्यक्त
यात्रा में शामिल दर्शनार्थियों के प्रति यात्रा के लाभार्थी प्रकाशचंद्र नांदेचा ने अन्तर्हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यात्रा का लाभ लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर आभार व्यक्त किया। दर्शन यात्रा में रतलाम धर्मदास जैन श्रीसंघ के सचिव अजित मेहता, प्रवर्तकश्री के सांसारिक भाई राजेश गादिया, अजीत जैन, निर्मल गोखरू, राजमल नाहर, अजय श्रीश्रीमाल, सुभाष नाहर, कनकमल नलवाया, भूपेंद्र बांठिया, प्रकाश संघवी, नरेंद्र दरड़ा, बाबूलाल धम्माणी, शांतिलाल मूणत, प्रकाश मांडोत सहित 50 दर्शनार्थी शामिल हुए। इस मौके पर सभी दर्शनार्थियों ने यात्रा के लाभार्थी की जय जयकार के साथ बहुत बहुत अनुमोदना की।