पुण्य जब तक पास देता हर कोई साथ, पाप उदय में आए कोई चलता नहीं साथ-समकितमुनिजी

  • पाप करने से डरने लग जाओ नहीं सताएगा सजा का भय
  • आदिनाथ सोसायटी के पारख धर्मसभा मण्डप में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन

पूना, 25 अगस्त। हमेशा याद रखे सुख में सब साथ आते है लेकिन दुःख में कोई साथ नहीं होता। पुण्य जब तक पास में होता है हर कोई साथ देता है लेकिन जब पाप उदय में आए तो साथ चलने वाले भी छोड़ जाते है। देवता भी तीर्थंकरों के जन्म, दीक्षा व देशना के समय आते है लेकिन जब भगवान आदिनाथ 13 माह तक आहार के लिए घूमते रहे तो नहीं आए। कर्मो का भुगतान तो करना ही होता है उससे हमे देवता भी नहीं बचा पाते है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख धर्मसभा मण्डप में श्रमणसंघीय वरिष्ठ सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शुक्रवार को नियमित चातुर्मासिक प्रवचन ‘‘कहानी द्रोपदी की, कहानी कर्म की’’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमे हमेशा पाप करने से डर लगना चाहिए न कि पाप करने पर मिलने वाली सजा से डरना चाहिए पर हम पाप से नहीं उससे मिलने वाली सजा से डरते है। ज्ञानीजन कहते है पाप करने से डरने लग जाओ पाप से मिलने वाली सजा का भय खत्म हो जाएगा। मुनिश्री ने कहा कि हम नफरत व घृणा पाप से करनी चाहिए पर हम पाप करने से वाले ऐसा करते है। आज का पापी कल धर्मात्मा हो सकता फिर उससे घृणा करके क्या मिल जाएगा। एक गलत कर्म की कितनी बड़ी सजा मिलेगी कोई नहीं जानता। क्रोध, अभिमान, माया व लोभ से गलत कर्म तो हो जाते पर जब इनका भुगतान करना पड़ता है तो स्थिति बड़ी विकट हो जाती है। धर्मसभा में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘‘प्रभु शांति का दातार, मेरा वंदन लो स्वीकार’’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।धर्मसभा में जैन कॉन्फ्रेंस वैयावच्च योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष रतनचन्द्र सिंघवी, बेंगलूरू से पधारे सुश्रावक मण्डल के सदस्यों के साथ भीलवाड़ा, मेरठ आदि स्थानों सहित पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।
जिनशासन की प्रभावना करने वाले महान विभूति थे वीरचन्द्र राघवजी
पूज्य समकितमुनिजी ने धर्मसभा में वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में जैन समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए पहली बार दुनिया के सामने जैनिज्म व जैन दर्शन को प्रस्तुत करने वाले वीरचन्द्र राघवजी गांधी की 159 वीं जयंति पर उन्हें भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मात्र 37 वर्ष की अल्पायु में दुनिया से विदा हो जाने वाली ऐसी महान शख्सियत आज भी अधिकतर जैन धर्मावलम्बी अनजान है। उन्होंने कहा कि पहली बार जब वह हवाई जहाज का उपयोग कर जैन धर्म की बात दुनिया के सामने रखने के लिए गए तो कई ने ये तर्क देकर विरोध किया कि जैन धर्म के लिए वाहन का उपयोग नहीं करना है। हम घूमने जाए या शिक्षा लेने जाए वाहन का विरोध नहीं था पर श्रावक धर्म का संदेश दुनिया में फैलाने जाने लगे तो पाप बता विरोध हो गया। मुनिश्री ने कहा कि हमारी मानसिकता बन गई है मुझे तो अपने धर्म करने से मतलब दूसरों से मुझे क्या मतलब। इसी मानसिकता के कारण विश्व पटल पर जैन धर्म पीछे छूटता चला जा रहा है। उन्होंने कहा कि अरिहन्त जागृति मंच के माध्यम से इस सम्बन्ध में अच्छा कार्य किया जा रहा है।
विरोध की परवाह नहीं कर आगम लिपिबद्ध होने से हमे उपलब्ध
समकितमुनिजी ने कहा कि विरोध हमेशा गलत कार्य का ही नहीं कई बार अच्छे कार्य का भी हो जाता है। श्री देवर्द्धिगणी क्षमाश्रमण जब आगम लिपिबद्ध करने का कार्य करने लगे तो कई लोगों ने भगवान ने लिखने से मना किया है का तर्क देकर विरोध कर दिया। इसके बावजूद श्री देवर्द्धिगणी क्षमाश्रमण ने कहा कि आगम लिपिबद्ध करने से यदि जिनवाणी सुरक्षित रहती है तो मुझे नरक में जाना भी मंजूर है। कल्पना करें उस समय विरोध का कैसा माहौल रहा होगा। इसके बावजूद विरोध की परवाह नहीं कर श्री देवर्द्धिगणी क्षमाश्रमणजी ने जो कार्य किया उसी कारण आज आगम अपने सामने है। विरोध से डरकर चुपचाप बैठ जाते तो पता नहीं क्या होता।
उवसग्गहर स्रोत के माध्यम से चिंतामणी पार्श्वनाथ प्रभु की आराधना
चातुर्मास के तहत 21 दिवसीय उवसग्गहर स्रोत साधना के चौथे दिन भी प्रवचन शुरू होने से पहले पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने करीब 15 मिनट साधना सम्पन्न कराई गई। इसके माध्यम से चिंतामणी पार्श्वनाथ भगवान की स्तुति की गई। इससे जुड़ने वाले श्रावक-श्राविकाओं ने चौथे दिन बियासना तप किया। इस आयोजन के तहत 10 सितम्बर तक प्रतिदिन प्रवचन से पहले सुबह 8.30 बजे से 15 मिनट तक उवसग्गहर स्रोत की साधना होगी। इसमें बीस दिन तपस्या के एवं अंतिम दिन पारणे का रहेगा। इसके तहत पांच राउण्ड होंगे प्रत्येक राउण्ड में पहले दिन निवि, दूसरे दिन पोरसी, तीसरे दिन एकासन एवं चौथे दिन बियासना की आराधना होगी।
रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में विशेष प्रवचन ‘‘किस्सा ननद भाभी का‘’ कल
रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में 27 अगस्त को पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन होगा। इससे पूर्व 26 अगस्त को ननद-भाभी के रिश्तों पर आधारित विशेष प्रवचनमाला ‘‘किस्सा ननद भाभी का-किस्सा अनारकली सूट का‘’ आयोजन होगा। पूज्य मुनिश्री की प्रेरणा से जैन संस्कृति ब्रिज के माध्यम से होने वाले सामूहिक रक्षाबंधन कार्यक्रम में 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए तीन वर्ग 6 से 9, 10 से 12 एवं 13 से 15 वर्ष में राखी मैकिंग कम्पीटिशन होगा। राखी बच्चों को घर से बनाकर लानी होगी। इसी तरह 16 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए रक्षाबंधन संदेश प्रतियोगिता होगी। रक्षाबंधन विशेष कार्यक्रम में उत्कृष्ट भाई-बहन पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता (ब्रदर-सिस्टर बेस्ट ट्रेडिशनल ड्रेसअप कंपीटिशिन) भी होगी। कार्यक्रम में आने वाली बहनों को आरती की थाली साथ लानी होगी। रक्षाबंधन की पोटली आयोजकों द्वारा दी जाएगी।