
रतलाम। भारतीय मध्य भारतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान प्रकाश आर्य द्वारा लेटर प्रेषित किया गया है। जिसमें बताया गया कि आज दिनांक 4-9-23 को स्टालिन का अपराध अक्षम्य है। तमिलनाडु के प्रधानमंत्री उदय निधि स्टालिन का सनातन धर्म के प्रति दिया गया बयान न केवल आपत्तिजनक है अभी तो देश की शांति को भंग करने वाला और अराजकता फैलाने का दुष्प्रयास है। इस प्रकार के बयानों से स्टालिन की सांप्रदायिक भावना स्पष्ट होती है। जिस विचारधारा के वे अनुयायी है। वह वर्षों से सनातन धर्म विरोधी ही रही है। धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाले राजनेता आज डरपोक और केवल वोटों की राजनीति वाले सिद्ध हो रहे हैं। इस प्रकार का बयान यदि किसी हिंदू के द्वारा दिया जाता है तो उनको आरएसएस जैसे हिंदू संगठनों और बीजेपी पर सैकड़ो बयान आ जाते हैं। रैलियां, प्रदर्शन करने लग जाते राजनेताओं का इस प्रकार मौन धारण ही सांप्रदायिक विचारधाराओं को प्रोत्साहन देता है। सनातन धर्म कोई व्यक्ति या पुस्तक नहीं है। कोई वस्तु नहीं है। जिसे कोई नष्ट कर दे। सनातन धर्म शाश्वत है। सदा रहने वाला सबके लिए और विश्व का पहला ज्ञान है जो परमात्मा का दिया हुआ है। सनातन धर्म एक समुद्र है। बाकी विचारधाराए उनकी कुछ बातों का हिस्सा है। कई आक्रांत और महजबी ताकतों ने सनातन धर्म का जब-जब विरोध किया उनका विनाश हुआ। आज उनका पता भी नहीं है। स्टालिन के इस राष्ट्रद्रोही कार्य कठोर दंडनीय है। आर्य समाज इसका विरोध करता है और इसकी निंदा करता है।