
जावरा (अभय सुराणा ) । तप जन्म जन्मांतर के कर्मों को क्षय करके आत्मा को निर्मल शरीर को निरोगी और पवित्र बनता है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनी कमलेश ने तपस्वी अक्षत मुनि जी के 36 उपवास के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते कहा कि तप अपने आप में रामबाण औषधि है मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग है। मुनि कमलेश ने बताया कि क्षमा से बड़ा कोई तप नहीं कोई साधना आराधना नहीं एक पल का क्रोध साधना को मिट्टी में मिला देता है। उन्होंने कहा कि कम खाना गम खाना और नम जाना इससे महान और कोई तपस्या नहीं हो सकती है यही साधना का सच्चा मार्ग है। उपाध्याय दिव्यचंद्र सागर जी महाराज ने कहा कि सद्भाव और प्रेम का हृदय में संचार होना तप का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। अभिग्रह धारी श्री राजेश मुनी जी महाराज ने कहा कि तप शक्ति से देव शक्ति चरणों की दासी बन जाती है। महासती आत्म ज्योति, उप प्रवर्तनी कीर्ति सुधा जी, रतन ज्योति जी, चरित्र रत्न सागर जी ने भी सभा को संबोधित किया। आचार्य सम्राट ध्यान योगी डॉक्टर शिव मुनि जी महाराज एवं प्रवर्तक विजय मुनि जी की ओर से तपस्वी अक्षत मुनि जी को तपस्वी रतन से सम्मानित किया गया। संघ की और से आदर की चादर समर्पित की गई। राजस्थानी जैन संघ मुंबई के प्रमुख उमरावज जी ओसवाल के प्रतिनिधि मंडल की मुम्बई के लिए 2024 का चातुर्मास मुनि कमलेश के लिए विनंती की गई। पश्चात चातुर्मास मुम्बई के लिए घोषित हुआ। महामंत्री रमेश जी भंडारी ने एकता पर जोर दिया जैन दिवाकर कमल गौशाला निंबाहेड़ा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल मारू एवं अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के संरक्षक अशोक मेहता ने तपस्वी का अभिनंदन किया। जैन कॉन्फ्रेंस,आ.भा.जैन दिवाकर मंच एवं संगठन समिति के वरिष्ठ मार्गदर्शक श्री अभय सुराणा के साथ ही राष्ट्रीय मंत्री निर्मल जैन गुजरात शाखा की महामंत्री आशा जैनने समारोह को संबोधित किया। सुशीला भगोता ने 51 उपवास, विजय जेलमी ने 28 उपवास, रुचि संचेती ने 15 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये। प्रकाश भटेवरा ने धर्मसभा का संचालन किया।