धर्म अभी नहीं करेंगे तो जीवन में फिर कब करेंगे- इन्दुप्रभाजी म.सा.

  • तपस्या व साधना से निर्मल व पावन बनती हमारी आत्मा- समीक्षाश्रीजी म.सा.
  • रूप रजत विहार में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन

भीलवाड़ा, 5 सितम्बर। जिनशासन की सेवा करने का अवसर सौभाग्य से ही प्राप्त होता है। कर्मो की निर्जरा कर भवसागर से मुक्ति होने की राह भी जिनशासन की प्रभावना करने से ही खुलती है। हम जप करें, तप करे, स्वाध्याय करें कुछ भी करे लेकिन धर्म साधना अवश्य करें। हमारी समस्याओं व दुःखों का समाधान जिनशासन की भक्ति में छुपा हैं। हम जिनशासन की भक्ति करेंगे तो हमारे दुःख कम होते जाएंगे। ये विचार भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजादनगर स्थित रूप रजत विहार में मंगलवार को मरूधरा मणि महासाध्वी श्रीजैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो जागरूक होते है वह स्वयं भी धर्म करते है ओर दूसरों को भी धर्म से जुड़ने की प्रेरणा प्रदान करते है। धर्म हमारे दिल में रच बच गया तो जहां भी जाएंगे धर्म अपने साथ रहेगा। जीवन में करनी है तो धर्म की कमाई कर ले जो संग जा सके ओर कभी मुश्किल पड़े तो राह में कुछ काम आ सके। उन्होंने कहा जीवन में यदि धर्म नहीं है तो ये समझना कुछ भी नहीं है। जो पर्वाधिराज पर्युषण पर्व आ रहे है वह हमारे लिए धर्म से जुड़ने ओर साधना करने का सुनहरा अवसर है। हम यदि अवसर भी छोड़ देंगे तो धर्म कब कर पाएंगे। उन्होंने जैन रामायण का वाचन करते हुए भी विभिन्न प्रसंगों से जुड़ी चर्चा की। धर्मसभा में तत्वचिंतिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने कहा कि तप, त्याग व साधना आत्मा को निर्मल व पावन बनाती है। जो इनसे दूर रहकर सांसारिक मायाजाल में उलझा रहता है वह कभी सुख की अनुभूति नहीं कर पाता है। जितना हम अध्यात्म व साधना से जुड़ेगे उतना अधिक खुशी ओर तनावरहित जिंदगी का अनुभव करेंगे। उन्होंने कहा कि हम धर्म से दूर जाकर कर्मबंध करते हुए अपने जीवन को जटिल बनाना चाहते है या धर्म के प्रति समर्पित होकर कर्मों का क्षय करते हुए जीवन को सहज व सरल बनाना चाहते है यह फैसला किसी ओर को नही ंहमे स्वयं करना होगा। हमारा फैसला ही हमारा भविष्य तय करता है। धर्मसभा में मधुर व्याख्यानी डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा., आगम मर्मज्ञा डॉ. चेतनाश्रीजी म.सा., आदर्श सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा., तरूण तपस्वी हिरलप्रभाजी म.सा. आदि का भी सानिध्य रहा। धर्मसभा में सुश्राविका श्रीमती सीतादेवी डांगी का एकासन का मासाखमण पूर्ण करने पर श्री अरिहन्त विकास समिति द्वारा स्वागत-सम्मान किया गया। धर्मसभा का संचालन युवक मण्डल के मंत्री गौरव तातेड़ ने किया। अतिथियों का स्वागत श्री अरिहन्त विकास समिति द्वारा किया गया। धर्मसभा में भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।
पर्युषण में अधिकाधिक तप साधना करने की प्रेरणा प्रदान
रूप रजत विहार में 12 से 19 सितम्बर तक मनाए जाने वाले पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की तैयारियां जारी है। इस दौरान प्रवचन के साथ जप, तप व भक्ति से परिपूर्ण विभिन्न आयोजन होंगे। पर्युषण अवधि में रूप रजत विहार स्थानक में अखण्ड नवकार महामंत्र जाप का आयोजन होगा। इसमें अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं की सहभागिता के लिए प्रयास किए जा रहे है। साध्वी दर्शनप्रभाजी म.सा. के अनुसार पर्युषण अवधि में तपस्या ओर सामायिक के लिए डायमण्ड, गोल्डन व सिल्वर कूपन भी जारी किए जाएंगे। प्रत्येक श्रावक-श्राविका को कोई न कोई कूपन अवश्य प्राप्त करना है इसकी प्रेरणा साध्वीवृन्द द्वारा दी जा रही हैै। इसके तहत पर्युषण में उपवास की अठाई पर डायमण्ड, आयम्बिल की अठाई पर गोल्डन व एकासन की अठाई पर सिल्वर कूपन मिलेगा। इसी तरह पर्युषण अवधि में 108 सामायिक पर डायमण्ड, 81 सामायिक पर गोल्डन एवं 51 सामायिक पर सिल्वर कूपन मिलेगा।
सर्वव्याधि निवारक घण्टाकर्ण महावीर स्रोत का जाप
रूप रजत विहार में मंगलवार को सुबह 8.30 बजे से सर्वसुखकारी व सर्वव्याधि निवारक घण्टाकर्ण महावीर स्रोत जाप का आयोजन किया गया। तत्वचिंतिका डॉ.समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने ये जाप सम्पन्न कराया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर सभी तरह के शारीरिक कष्टों के दूर होने एवं सर्वकल्याण की कामना की। चातुुर्मासकाल में प्रत्येक मंगलवार को सुबह 8.30 से 9.15 बजे तक इस जाप का आयोजन हो रहा है। उक्त जानकारी निलेश कांठेड़ मीडिया समन्वयक रूप रजत विहार भीलवाड़ा चातुर्मास-2023 ने दी।