आध्यात्मिक ज्ञान और अंधविश्वास एक साथ नहीं दे सकते, दोनों मे 36 का आंकड़ा है – राष्ट्रसंत कमल मुनी कमलेश

इंदौर महावीर भवन 13 सितंबर 2013 । अंधविश्वस हमारे लिए शत्रु अग्नि और जहर से भी अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है यह तो तन का ही नुकसान करते हैं परंतु अंधविश्वास आत्मा के बाल को कमजोर करके जन्म जन्मांतर खामियांजा भोगना पड़ता है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनी कमलेश ने धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि अंधकार और प्रकाश एक साथ नहीं रह सकते वैसे ही आध्यात्मिक ज्ञान और अंधविश्वास एक साथ नहीं दे सकते दोनों मे 36 का आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि जिसके माध्यम से आत्म बल कमजोर हो वह पाप है और जिसके माध्यम से फौलादी बने वह धर्म की परिधि में आता है।
मुनि कमलेश ने बताया कि 21वीं सदी में भी नरबलि पशु बलि होना आध्यात्मिकता की दुहाई देने वालों के लिए कलंक और शर्मनाक घटना है। राष्ट्र संत ने कहा कि ग्रेजुएट डिग्री धारी जब इसके शिकार होते हैं तो तरस आता है किसी भी निमित्त को देख कर शुभ अशुभ मानना अज्ञानता का है।
जैन संत ने बताया कि डॉक्टर वैज्ञानिक सैनिक कर्म में विश्वास करते हैं तभी इतनी तरक्की हुई है अंधविश्वास के शिकार हो जाते तो क्या यह सब उत्थान संभव हो सकता क्याऔर पीछे जाते।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉक्टर प्रज्ञाप्रणव जोशी कार्यकर्ता दुबई से गुरु चरणों में उपस्थित हुए आध्यात्मिक शक्ति के स्वरूप को समझाया संघ की ओर से उनका सम्मान किया गया आदर्श बहू मंडल में प्रतियोगिता का आयोजन किया कौशल मुनि मैं अंतगढ़ एवं रश्मि जी ने कल्पसूत्र का वाचन किया घनश्याम मुनि ने विचार व्यक्त किया संचालक प्रकाश भटेवरा ने किया महामंत्री रमेश भंडारी ने आभार व्यक्त किया। 14 सितंबर को चर्च के विसब चाकौ धर्मसभा में पधारकर प्रेम और सद्भाव का संदेश देंगे।