
जावरा (अभय सुराणा) । अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी विषय अध्यापन में अपनी सु दीर्घ सेवाएं दे रही प्रोफेसर आभा सक्सेना एवम मैडम लक्ष्मी जोशी का हार्दिक अभिनंदन एवम सम्मान मोती माला , मोमेंटो एवम उपहार प्रदान कर किया गया ।
कार्य क्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रतीक सोनवलकर संयुक्त आयुक्त क्षेत्रीय ग्रामीण विकास इंदौर एवम अध्यक्षता की महाविद्यालय जावरा के पूर्व प्राचार्य श्री ए. एन.पालीवाल साहेब ने ।
उक्त अवसर पर अतिथियों एवम उपस्थित प्रबुद्ध वर्ग ने हिंदी की वर्तमान दशा और दिशा पर अपने विचार साझा किए । सभी ने एक मत से स्वीकार किया कि भारत में हिंदी सबसे ज्यादा बोली एवम लिखी जाने वाली भाषा है ।हिंदी पुरातन भी है और आधुनिक भी ।हिंदी विविधता में एकता का सूत्र है ।हिंदी देश के सामाजिक,राजनेतिक ,सांप्रदायिक एवम भाषाई समन्वय एवम सौहार्द्र का प्रतीक है ।हिंदी अन्य भाषाओं के प्रचलित शब्दों को अपने में समाहित करके सही मायने में भारत की संपर्क भाषा की भूमिका निभा रही है ।
कविवर रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा था कि यदि भारतीय भाषाएं नदियां है तो हिंदी महानदी है इसलिए कि उन्हें हिंदी के महत्व का बोध था ।
हिंदी ने राष्ट्रीय एकता का मार्ग तो प्रशस्त किया है ।
वक्ताओं द्वारा युवा पीढ़ी पर हावी होती अंग्रेजियत पर चिंता भी जताई और घर घर हिंदी बोलने ,लिखने ,पढ़ने पर जोर दिया और युवा पीढ़ी को इसके सौंदर्य से जुड़ने और इसकी वैज्ञानिकता को समझने पर भी बल दिया ।
इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिनमे कवि रमेश मनोहरा ,फजल हयात ,मनोहर मधुकर ,दिनेश उपाध्याय ,आशा उपाध्याय ,जुझार सिंह भाटी ,नवनीता चौरसिया ,चारु क्षोत्रिय ,दिनेश बारोट ,राजेश राज आदि कवियों ने अपने गीत ,गजलों और कविताओं से समा बांधा । संस्था अध्यक्ष डॉ प्रकाश उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया एवम संस्था की आगामी गतिविधियों एवम कार्य योजना की जानकारी दी । करीब चार घंटे चले कार्यक्रम का सुंदर साहित्यिक संचालन कवि राजेंद्र क्षोत्रीय ने किया । राम चचलानी , आई. पी.त्रिवेदी ने अपने भजनों की प्रस्तुति दी । अंत में आत्मीय आभार प्रदर्श डॉ ज्योति उपाध्याय ने किया ।