मोहन टॉकीज सैलाना वालों की हवेली में गुणानुवाद सभा का आयोजन


रतलाम। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में श्री दौलतसागरसूरीश्वरजी म. का 103 वां जन्मोत्सव एवं श्री हर्षसागरसूरीश्वरजी म.सा. का स्वर्गवास निमित्त सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में गुणानुवाद सभा हुई। इसमें आचार्य श्री ने कहा कि श्री दौलतसागरसूरीश्वरजी म. ने सेवा, संयम और स्वाध्याय के तीन मंत्र बताए है।
आचार्य श्री ने कहा कि यदि सेवा करना है तो अहंकार को तोड़ना ही होगा, बिना इसे तोड़े सेवा नहीं कर सकेंगे। दौलतसागरसूरीश्वरजी म. का सेवा के साथ संयम का भाव भी मजबूत था। उन्हे 12 लाख श्लोक कंठस्थ थे। जिस तरह फोटो हमारे बाहरी आवरण और एक्स-रे आंतरिक आवरण को दर्शाता है। ठीक ऐसे ही प्रभु ने मानव भव दिया है तो हमे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बाहर से हम कैसे भी हो लेकिन भीतर का आवरण बेहतर होना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रवचन हमारे फोटो है और आंतरिक परिणिती का विकास एक्स-रे की तरह है। हम तीर्थों की यात्रा तो करते रहते है, हमे ज्ञानी भगवंतों की यात्रा भी करना चाहिए। व्यक्ति के चले जाने के बाद उसकी अहमियत का हमें पता चलता है। ज्ञानी भगवंत भी खूब मिलते है लेकिन ऐसे गुरूवर मिलना बहुत ही मुश्किल है।
रविवार को होगीसामूहिक चैत्यपरिपाटी
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में 15 अक्टूबर, रविवार को पर्युषण के कर्तव्य स्वरूप सामूहिक चैत्यपरिपाटी का आयोजन प्रातः 6.15 बजे से होगा। आचार्य श्री ने बताया कि हम मासक्षमण करले, लाखों का दान कर ले और चौसठ प्रहरी पौषध भी कर ले लेकिन पर्युषण पर्व के पांच कर्तव्यों को पूर्ण न करें करे वहां तक पर्वाधिराज की आराधना पूर्ण नहीं होती। इन पांच कर्तव्यों में मुख्य कर्तव्य मतलब चैत्यपरिपाटी है। यह राजमल हेमंतकुमार राकेशकुमार भंडारी के गृहआंगण मोहन टॉकीज से प्रारंभ होकर पांच जिनालयों का दर्शन करते हुए बिबड़ोद तीर्थ में पूर्ण होगी। वहां प्रवचन के पश्चात सभी की नवकारसी होगी। इसके लाभार्थी राजमल भैरूलाल भंडारी, नास्कावाला परिवार है। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा अधिक से अधिक संख्या में धर्मालुजनों से उपस्थित होने का आव्हान किया है।