रतलाम,16 अक्टूबर। छोटू भाई की बगीची में सोमवार को आचार्यश्री नानेश का युवाचार्य चादर प्रदान दिवस श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक मनाया गया। पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने गुणानुवाद करते हुए कहा कि आचार्यश्री नानेश कभी देह से सोते होंगे, लेकिन आत्मा से सदैव जागृत रहते थे। उन्होंने जीवन में कभी अजागृति का कोई कार्य नहीं किया। वे संकल्पशील साधक थे।
आचार्य प्रवर ने बताया कि महापुरूष कहते है कि दुनिया में डाक्टरों का, वकीलों का, विद्वानों का और राजनेताओं का जितना महत्व है, उनसे ज्यादा गुरू का महत्व होता है। डाक्टर तन की तकलीफ सुधार सकते है, वकील जीवन की तकलीफों को दूर कर सकते है, विद्वान हमे समझदार बना सकते है, लेकिन गुरू तो आत्मा को परमात्मा बनाते है। हमारे जीवन में आचार्यश्री नानेश का अहम योगदान है। उनकी कृपा और उपकारों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता है।
आचार्य प्रवर ने कहा कि शिष्ट बनकर आचार्यश्री नानेश विशिष्ट बने। जीवन के संध्याकाल में उन्होंने अंर्तमुखी बनकर आत्म शांति और समाधि प्राप्त की। आज हमारे पास जो भी है, वह गुरूदेव की कृपा है। उन्होंने प्रज्ञा, पहचान, प्रशंसा सबकुछ दिया है। अपने जीवनकाल में आचार्यश्री नानेश ने 350 दीक्षा दी। रतलाम में एक साथ 25 दीक्षा का प्रसंग अविस्मरणीय था। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनका वास्तविक गुणानुवाद है।
आरंभ में उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने गुरू, देव और ब्रम्ह भक्ति पर प्रकाश डालते हुए आचार्यश्री नानेश का गुणानुवाद किया। महासती श्री इन्दुप्रभाजी मसा ने 28 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण मौजूद रहे।
राष्ट्रीय स्वाध्याय दिवस मनाया
श्री संघ अध्यक्ष मोहनलाल पिरोदिया एवं मंत्री दिलीप मूणत ने बताया कि गुरू सप्ताह महोत्सव के तहत गौशाला में गोसेवा की गई तथा सोमवार को राष्ट्रीय स्वाध्याय दिवस मनाया गया। 17 अक्टूबर को प्रेरणा की पहल का आयोजन होगा। आचार्यश्री के जन्म दिवस पर 18 अक्टूबर को गुरू सप्ताह का समापन सामायिक एवं एकाशना दिवस के रूप में समापन होगा। अभा साधुमार्गी शांतक्रांति जैन युवा संघ ने समाजजनों से अधिक से अधिक सहभागिता करने का आव्हान किया है।