
रतलाम, 16 अक्टूबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधि विजयजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन देते हुए चार प्रकार के दान महत्वपूर्ण बताए। मुनिराज ने चार प्रकार के इंसान बताते हुए दानो को परिभाषित किया।
चार प्रकार के इंसानों पर प्रकाश डालते हुए मुनिराज ने कहा कि पहले स्थान पर वे लोग होते है जो दुखी जीवों के दुख में अपने समय का दान करते है। उनके दुखों को सुनने के लिए वह उनके साथ बैठते है और समय व्यतीत करते है। जो व्यक्ति अपने सुख के समय में दूसरे जीवों को समय नहीं देता है, ऐसे लोगों का जब समय बदलता है तब उनके साथ भी कोई नहीं होता है। मुनिराज ने कहा कि दूसरे प्रकार के इंसान वह होते है जो समय देने के साथ अच्छे शब्दों के माध्यम से संबंधित की पीड़ा को दूर करने का प्रयास करते है। ऐसा करने से दुखी व्यक्ति का मन दुख से भटकता है। तीसरे नंबर पर उन व्यक्तियों का उल्लेख किया गया जो दुखी इंसान के दुख को दूर करने के लिए अपनी संपत्ति का भी दान करते है। इसी प्रकार चौथे प्रकार के व्यक्ति के बारे में बताया गया कि ऐसे लोग न केवल समय, शब्द और संपत्ति का भी दान करते है, अपितु वे दुखी जीव को समाधि का भी दान करते है। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।