
रतलाम, 23 अक्टूबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में सोमवार को विशेष प्रवचन में श्रीपाल-मयणा के प्रसंग का वर्णन किया। इसके साथ ही उनके गुणों को आत्मसात करने की बात कही। आचार्य श्री ने कहा कि हम प्रभु से पुण्य तो हर जन्म में मांगते है लेकिन जिस दिन गुणों का पट्टीकरण मांग लिया, उस दिन जीवन धन्य हो जाएगा। आचार्य श्री ने कहा कि हम कभी प्रभु से यह नहीं कहते कि किसी की समृद्धि देखकर हमारे में जो जलन द्वेष भावना उत्पन्न होती है, वह नहीं होना चाहिए। हममे काम, क्रोध, ईष्या, लोभ, निंदा, अहंकार, सब खत्म हो जाए और क्षमा, संतोष, नम्रता, गुणों का भाव आए। हम प्रभु से सिर्फ पुण्य के लिए मांग करते है, गुणों के लिए नहीं। जीवन में यदि श्रीपाल-मयणा के गुणों को आत्मसात कर लिया तो मानव भव सफल हो जाएगा। आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य, हमेशा फोटो जैसा है लेकिन गुणों का पट्टिकरण एक्स-रे जैसा होता है। हमारा फोटो तो बहुत सुंदर है लेकिन एक्स-रे का कोई ठिकाना नहीं है। हमें गुणों के माध्यम से भीतर के एक्स-रे को सुधारना चाहिए। दुख के समय दुनिया हमेशा आपके घाव पर नमक छिड़केगी और देव गुरू मलहम लगाने का काम करेंगे। उनके आशीर्वाद से ही सुख-शांति मिलेंगी। यदि हम प्रभु की आराधना करते रहेंगे तो कहीं भटकने की जरूरत नहीं होगी। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।