(अभय सुराणा ब्यूरो चीफ)
जावरा । बचपन से एक कहावत सुनते आ रहे हैं कि हाथी के दांत खाने के और और दिखाने के ओर यह कहावत वर्तमान में कांग्रेस की राजनीति में देखने को मिल रही है।
कांग्रेस में चल रही उठा पटक वह परदे के पीछे की कहानी की ओर संक्षिप्त नजर डालते हैं तो पता चलेगा कि किसी फिल्म के गाने की तरह क्या हुआ तेरा वादा चरितार्थ होता दिख रहा है।
विधानसभा चुनाव में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जावरा वह ग्रामीण कांग्रेस कमेटी की ओर से विधानसभा चुनाव में टिकट स्थानीय नेताओं में से किसी एक को दिया जाए इस बात को लेकर बाहरी उम्मीदवार वह स्थानीय उम्मीदवार की बात पिछले कई महीनों से सुर्खियां बटोर रहा था नेताओं ने बार-बार अपने समर्थ को साथ ले जाकर जावरा से बाहर दूसरी तहसील के लोगों को टिकट नहीं देने के बात भी करी थी एवं इसके पीछे की सारी बातें आला कमान को लिखित में दी थी। तब कांग्रेस अध्यक्ष श्री कमलनाथ जी ने इनको भरोसा भी दिलाया था। टिकट फाइनल होने के कुछ समय पूर्व एक नेताजी ने अपने समर्थकों के साथ जब भोपाल गए यह अलग बात है कि उस दिन एक ही नेता पहुंच पाए थे दो जावरा में थे कहा कि मैं आपसे तेरीहवी बार मिल रहा हूं और हर बार यही निवेदन कर रहे हैं की स्थानीय उम्मीदवार को मौका दिया जाए।
जब जावरा विधानसभा हेतु कांग्रेस प्रत्याशी की हाई कमान द्वारा घोषणा की गई तो स्थानीय उम्मीदवार हिम्मत सिंह श्रीमाल का नाम लिस्ट में आया, तब उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया वह सम्मान समारोह आयोजित किया गया।डॉक्टर कैलाश नाथ काटजू व डॉक्टर भीमरावअंबेडकर की प्रतिमा तक अपने समर्थकों के साथ जो रैली निकाली गई वह वास्तविकता में उनके हौसले को बहुत बड़ा रही थी, लेकिन खास बात यह रही की इस रैली में या उसके बाद हुई दो मीटिंग में स्थानीय दो नेता जो कहते थे हाई कमान से की हम में से किसी को भी टिकट दे दो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन उन दो उम्मीदवार की अनुपस्थिति ने स्पष्ट कर दिया था कि उनका नाम कट जाने से वह अपनी सक्रियता नहीं निभा पाए और बहाना बनाकर कार्यक्रम में नहीं आए। जबकि प्रत्याशी हिम्मतसिंह श्रीमाल ने इन दोनों उम्मीदवारों के घर जाकर उनसे सहयोग की बात भी कहीं। अचानक उन्हें यह आभास हुआ कि टिकट परिवर्तित हो सकता है तो तत्काल अपने चार समर्थकों के साथ भोपाल कमलनाथजी, दिग्विजय सिंह, सुरजेवाला व इंदौरा आदि नेताओं से चर्चा करी। चर्चा के बाद यह आश्वस्त होकर जावरा आ गए। लेकिन…. अब बात करते हैं बाहरी व्यक्तियों के (स्थानीय व बाहरी हमारे द्वारा परिभाषित नहीं है यह स्थानीय उम्मीदवारों द्वारा कहा गया है) में भी तीन उम्मीदवार लगातार जनता के बीच जाकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रहे थे और कांग्रेस की रीति नीति को लेकर बड़े-बड़े फ्लेक्स शहर में वह गांव में लगा रहे थे तथा मतदाताओं से फार्म भी भरा रहे थे तब यह तीन ही दावेदार अलग-अलग व्यक्तिगत रूप से आला कमान के पास जाकर अपनी प्रबल दावेदारी भी बता रहे थे जब भी कोई बड़ा नेता आता था तो ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बाद में आते थे पहले वह इन नेताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जाते थे इसकी कसक या नाराजगी हमेशा स्थानिय कांग्रेस यानी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को रही है। कई बार यह नाराजगी ऊपर नेताओं से भी की गई लेकिन इसका असर कहीं नहीं दिखा।
इस कहानी में अचानक मोड़ आया जब हाई कमान की ओर से कांग्रेस द्वारा घोषित प्रत्याशी के रूप में हिम्मत श्रीमाल का नाम लिस्ट में आ गया तब तीनों नेता आला कमान के नेताओं से मिले और टिकट परिवर्तन की मांग करते हुए कहा कि आप हम तीनों में से चाहे किसी को भी टिकट दे दो हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे तब पार्टी को जावरा कि सीट जीत कर देंगे हाईकमान के निर्देश पर जावरा सीट के लिए अंतिम समय में ऑब्जर्वर भी भेजे गए तथा गोपनीय रिपोर्ट करी। यह अलग बात है कि दोनों ग्रुपों को जो उस समय भोपाल में थे संकेत मिल गए थे कि ऑब्जर्वर जावरा पिपलोदा में घूम रहे हैं तब वहीं से इन नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देशित भी करने का कार्य किया ऐसा सूत्र बताते हैं। सारी स्थिति पर विचार करने के बाद हाई कमान ने टिकट को चेंज कर दिया और इसकी जगह श्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी का नाम फाइनल कर दिया। लेकिन जब नामांकन भरने की बात आई तो एक नेताजी ने निर्दलीय फॉर्म भर दिया और सोशल मीडिया पर अपना वीडियो भी जारी कर दिया लेकिन लगता है कि नेताजी के मन में यह बात रही होगी कि मेरे कार्यशैली को देखते हुए मुझे टिकट दिया जाना उचित था। नेताजी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना फॉर्म तो भर दिया लेकिन लगता है कि वह अपना नाम वापस ले लेंगे हाई कमान से फोन आने के बाद। दूसरे नेताजी अभी कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आए हैं हालांकि एन वक्त पर उन्होंने
अपना फॉर्म नहीं भरने का फैसला कर उचित निर्णय लिया। अभी नेताजी रतलाम विधानसभा ग्रामीण में कांग्रेस प्रत्याशी के साथ प्रचार प्रसार कर रहे हैं। अब कांग्रेस प्रत्याशी श्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी स्थानीय व बाहरी सभी नेताओं को अपने पक्ष में लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनना तय है तो फिर क्षेत्र का विधायक भी कांग्रेस का होना चाहिए ताकि समस्याओं का समाधान भी शीघ्र होगा और कांग्रेस जावरा विधानसभा में भी अपना परचम लहराएगी। यह कांग्रेस की अपनी कहानी है जो कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बनी हुई है। निष्ठावान कार्यकर्ता का कहना है कि हमें गुटबाजी से कोई लेना-देना नहीं है जिसके पास कांग्रेस का चुनाव चिन्ह होगा हम उसका कार्य करेंगे।
लेकिन इन दावेदारों के अलावा कुछ नेता ऐसे भी है जो अपनी भावी राजनीति को देखते हुए हर परिस्थिति पर निगाह बनाए हुए हैं और अपना समीकरण देख रहे हैं। अभी यह नेता अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश भी नहीं दे पा रहे हैं। अगर समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया तो हो सकता है कुछ कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर अन्य जगह भी जा सकते हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 5 नवंबर को जावरा मे आयोजित आमसभा के बाद इन नेताओं व उनके कार्यकर्ताओं की स्पष्ट हो जाएगी।
एक बात यह भी उल्लेख नहीं है कि नगर पालिका परिषद जावरा में कांग्रेस का बहुमत है और कांग्रेस के पार्षद भी अभी सभी पार्टी के साथ नहीं दे रहे हैं वह भी वेट एंड वॉच का फार्मूला अपना रहे हैं।
कुछ समय पूर्व टिकट चेंज होने पर जो पदाधिकारी अपने उद्बोधन में हाई कमान के फैसले को गलत बताकर टिकट परिवर्तन का विरोध कर इस्तीफे दे दिए थे उनमें से अधिकांश पार्टी प्रत्याशी वीरेन्द्र सिंह सोलंकी के साथ खड़े नजर आ रहे है।