छोटू भाई की बगीची में प्रवचन : जो आनंद संयम में, वह संसार में नहीं- आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा

रतलाम, 01 नवंबर। चोट लगती है, आगे बढने के लिए, इसलिए आगे बढो। असफल होते है, सीखने के लिए, इसलिए सीखों। खोते है, पाने के लिए, इसलिए सदैव पाने का प्रयास करों। जीवन का सबसे बडा सबक दर्द है। दर्द को जो नहीं समझ पाता है, वह आगे नहीं बढ पाता है। लेकिन दर्द को जिसने समझ लिया, वह आगे बढ जाता है।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन देते हुए उन्होंने संयम जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि जो आनंद संयम में है, वह संसार में नहीं है। संसार की विषमताओं का जिसे बोध हो जाता है और जो खुद को जान लेता है, वह संयम जीवन अंगीकार करता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन को पाना ही पर्याप्त नहीं है। आगे बढना और बढाना हम सबका कर्तव्य है। यदि कोई आगे नहीं बढता, तो ये उसकी कमजोरी है। जीवन का हर तर्क सबक देने वाला होता है। समझदार वहीं होता है, जो तर्क से सबक ले लेता है। मंजिल उन्हें ही प्राप्त होती है, जो आगे बढते है, इसलिए आत्मा को परमात्मा में परिवर्तित करने के लिए आगे बढते रहना चाहिए।
आरंभ में उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने तप की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मानव भव में ही जप,तप करके हम अपना कल्याण कर सकते है। तरूण तपस्वी श्री युगप्रभजी मसा ने श्रावक के आचरण बताए। उन्होंने कहा श्रावक-श्राविकागण धर्मपूर्ण आचरण कर अपने मानव भव को सार्थक कर सकते है। प्रवचन में कई धर्मालुजन उपस्थित रहे।

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