जहां पर आपस में प्रेम और सद्भाव नहीं वह कितनी कठोर साधना कर ले उसका धार्मिकता की शुरुआत नहीं- राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

इंदौर महावीर बाग 1 नवंबर 2023 । गच्छ पंथ और संप्रदाय और बाहरी क्रिया कांड को लेकर अपनी अपनी डफली अपना अपना राग अलापकर एकता को खंडित करने वाले धार्मिक तो क्या इंसान कहलाने के अधिकारी भी नहीं है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने आचार्य पूर्णानंद सागर जी के 51 दीक्षा जयंती पर संबोधित करते कहा कि किसी भी निमित्त से भी बिखराव हो वह अक्षम में अपराध है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग नास्तिक से भी अनंत गुना ज्यादा खतरनाक होते हैं नास्तिक तो अपना ही नुकसान करता है परंतु अगलाव वादी स्वयं के साथ धर्म मानवता और विश्व को नफरत की ज्वाला में झोंक देते हैं।
मुनि कमलेश से बताया कि जहां पर आपस में प्रेम और सद्भाव नहीं वह कितनी कठोर साधना कर ले उसका धार्मिकता की शुरुआत नहीं। राष्ट्र संत ने बताया कि महापुरुषों ने कठोर साधना करके शासन रूपी संगठन और एकता के बगीचे को लगाया यदि वह धरती पर आकर वर्तमान दुर्दशा को अपनी आंखों से देख ले तो मे सेदमे से ही दम तोड़ देंगे।
आचार्य पूर्णानंद सागर जी ने कहा की हम संगठित नहीं हुए तो हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा एकता से बढ़कर कोई धर्म साधना और मोक्ष नहीं। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से आचार्य प्रवर को वात्सल्य मूर्ति पद से मुनि कमलेश ने अलंकृत किया हजारों जनता ने एकता और अखंडता की शपथ ली

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