


रतलाम । श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक स्थानक पर परम पूज्य गुरुदेव उपप्रवर्तक श्री अरुणमुनिजी म.सा. का अवतरण दिवस धर्म ध्यान जप तप के साथ धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर सजोड़े पेसठिया यंत्र का जाप और सामूहिक एकासन का कार्यक्रम रखा गया । श्राविकाओं ने केसरिया साड़ी और पुरुष वर्ग ने श्वेत परिधान में जाप किये।
एकासन के लाभार्थी श्रीमती भवँर बाई, शांतिलालजी पोखरना की स्मृति में प्रदीप कुमार राहुलकुमार पोखरना ने लिया । धर्मसभा में उपस्थित समस्त श्रद्धालुओ का स्वामीवात्सल्य इस अवसर पर रखा गया।
पेसठिया यंत्र जाप के लाभार्थी कमलाबाई बसन्तीलालजी पटवा परिवार रहे। साथ ही इस चातुर्मास काल में 100/50 प्रतिक्रमण करने वाली श्राविकाओं का बहुमान श्रीमती मगनबाई मोतीलालजी डाँगी परिवार की और से किया गया ।
इस अवसर पर मन्दसौर, जावरा, मुंबई, कलकत्ता आदि शहरों से भक्तगण उपस्थित हुए। संघ अध्यक्ष ललित पटवा, संघ रतन इंदरमल जैन, महेंद्र बोथरा, मनीष भटेवरा, प्रोफेसर मनोहर जैन, अभय गाँधी, महावीर छाजेड़ आदि ने अपने विचार व्यक्त किये सभा का संचालन महामन्त्री विनोद बाफना ने किया।
पूज्य गुरुदेव का जीवन परिचय
आपका जन्म शेगांव (महाराष्ट्र) में दिनाकं 3 नवम्बर 1959 को हुआ! आपके पिताश्री का नाम श्री शंकर लाल जी जैन व माताजी का नाम श्रीमति ममता बाइ जैन हे! सन्त- सतियो का सानिध्य प्राप्त हुआ, वैराग्य भाव जागृत हुए।
आपकी भागवती दीक्षा राजस्थान के प्रमुख धार्मिक व व्यावसायिक नगर ब्यावर में विक्रम संवत 2031 की कार्तिक शुक्ला सप्तमी तदानुसार 21 नवम्बर2074 को हुई तपस्वी श्री लाभ चंद जी म. सा आपके गुरु बने।
दीक्षा के बाद गुरुदेव तपस्वी श्री लाभ चंद जी म. सा के साथ रह कर अध्ययन किया, कालान्तर आपके भ्राता नें भी दीक्षा ग्रहण की जो सरल मना सेवाभावी श्री सुरेश मुनि जी म. सा है।
दीक्षा के बाद 16 चातुर्मास गुरुवर के साथ में रहे,व उनकी सेवा में सदा तत्पर रहे। आपका विचरण क्षेत्र बहुत लम्बा रहा है आप, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र, दिल्ली, चंडीगढ आदि सुदुर अंचलो में विहार कर धर्म प्रभावना की।
दस वर्षो तक आप झारखंड में पेतरबार ग्राम में गुजराती संत श्री जयन्ती लाल जी महाराज की सेवा में रहे। आप स्वयं तपस्वी है , प्रति रविवार, मंगलवार, गुरुवार को उपवास करते है एवं शनिवार को एकासन करते है।
आप जंहा भी चातुर्मास करते है 24 ही घन्टे नवकार मंत्र के जाप संघ परिवारो में बारी बारी से हो प्रयास करते है, अभी भी कई भी चातुर्मास हो बारह घंटे का जाप तो करवाते ही है। आपकी मुख्य प्रेरणा आयम्बिल तप आराधना की प्रेरणा रहती है, आपकी प्रेरणा से सेंकड़ो श्रावक-श्राविकाओ ने पुष्य नक्षत्र के आयम्बिल किये है व कर रहे हैं।
जैन दिवाकर- मुनि लाभ नैत्र चिकित्सालय मन्दसौर, आपकी प्रेरणा से एक ऐसी संस्था कार्यशील हे जो नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अपना एक विशेष मुकाम प्राप्त कर चुकी हें उसका प्रबंधन बहुत ही कुशल हाथो में है।
आपने जंहा भी चातुर्मास किया वंहा पर आप की प्रेरणा से उदार मन से दान देने वालो की एक लम्बी कतार है, व आपके इशारे से दान देते है व संस्था में योगदान देते है, इसका सब से बड़ा उदाहरण जैन दिवाकर मुनि लाभ नेत्र चिकित्सालय का वह वर्तमान में आधुनिक विस्तृत रूप है जो आपकी सदप्रेरणा से बना हैं।