प्रशंसा के लिए हमारे पास शब्द नहीं होते और आलोचनाओं के लिए पूरी डिक्शनरी भरी पड़ी है- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

रतलाम, 6 नवम्बर। जीवन में हमेशा पाप का पश्चाताप करना चाहिए, पुण्य का नहीं। कुछ लोग पुण्य का भी पश्चाताप करते हैं, जो गलत है। यदि आप गुरू वंदन करते हो और उसके बाद पश्चात करते हो तो उस वंदन का कोई महत्व नहीं रहेगा। यह मन हमारा है और उसमें आने वाले विचार भी हमारे हैं तो अच्छे विचारों को ही मन में लाएं, बूरे नहीं।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलानी वालों की हवेली मोहन टॉकीज में प्रवचन में कही। आचार्य श्री ने प्रवृत्ति, प्रेरणा, प्रोत्साहन, पक्षपात और प्रशंसा के बारे में विस्तृत रूप से समझाते हुए कहा कि जहां जिसकी आवश्यकता हो वहां, वैसा करते रहना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की कुछ अच्छा करने की प्रवृत्ति है, उसे प्रेरणा है तो उसे अच्छे कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करें और कार्य होने पर उसकी प्रशंसा भी करें। यदि ऐसा करते हैं तो व्यक्ति को और अधिक बेहतर करने का मन होता है। ठीक इसके विपरित यदि हम किसी के द्वारा किए गए अच्छे कार्य की प्रशंसा नहीं करते है और उसे प्रोत्साहन नहीं देते हैं तो संबंधित हताश हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में धर्म की प्रवृत्ति है, सतगुरु की प्रेरणा भी है और काम नहीं हो रहा तो उसके पीछे कारण प्रोत्साहन की कमी होती है। प्रोत्साहन से काम करने की प्रवृत्ति को बल मिलता है। हमेशा सतकार्य को प्रोत्साहन दें और उसकी प्रशंसा करें, अवगुणों की नहीं। वर्तमान दौर में समस्या यह है कि प्रशंसा के लिए हमारे पास शब्द नहीं होते और आलोचनाओं के लिए पूरी डिक्शनरी भरी पड़ी है। हमे इससे बचने की आवश्यकता है।
श्री उत्तराध्ययन सूत्र की वाचना मगंलवार से
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में श्री उत्तराध्ययन सूत्र की वाचना 7 से 12 नवम्बर तक प्रतिदिन सुबह 9 से 10.30 बजे तक होगी। मंगलवार को इसकी शुरूआत से पूर्व प्रातः 8.15 से आगमोद्धारक भवन, सेठजी का बाजार से श्री उत्तराध्ययन सूत्र की आगमयात्रा एक अहोभावयात्रा के रूप में निकाली जाएगी। इसमें श्री संघ की सभी महिला मंडल की 108 श्राविकाएं सिर पर श्री उत्तराध्ययन सूत्रको लेकर यात्रा की शोभा बढ़ाएगी। यात्रा सुबह 9 बजे मोहन टाॅकीज पहुंचेगी। यहां उत्तराध्ययन सूत्र की वाचाना आरंभ होगी। इसमें भगवान महावीर ने अपने जीवन के अंतिम दो दिनों में 16-16 प्रहर तक लगातार जो देशना दी थी। उत्तराध्ययन सूत्र की वाचना 6-6 दिन तक अखंड प्रतिदिन 1.30 घंटे तक चलेगी। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा अधिक से अधिक संख्या में धर्मालुजनों से उपस्थित रहकर धर्म लाभ लेने का आव्हान किया है। प्रवचन के पश्चात प्रभावना के लाभार्थी स्व. प्रकाशदेवी नाथुलालजी संघवी परिवार एवं श्री पार्श्वनाथ जैन मित्र मंडल टी.आई.टी. रोड रहेगा।