भाई बहन के रिश्ते मे लाग-लपेट, स्वार्थ, सौदेबाजी नहीं, अटूट प्रेम रहता है-आचार्य प्रवर श्री विजय राज जी मसा

रतलाम 15 नवम्बर 2023 । भाई बहन का रिश्ता आत्मीय रिश्ता होता है। इसमे कोई स्वार्थ, मतलब लाग लपेट और सौदेबाजी नही होती है। यह रिश्ता वास्तविक होता है। भगवान महावीर के निर्वाण के बाद उनके भाई-बहन के बीच के प्रसंग से प्रेरित होकर इसे मनाया जाना चाहिए। समस्या हर व्यक्ति के जीवन मे आती है, लेकिन उससे डरना नही चाहिए। समस्या का सामना करों, सहन करों, समाधान करों, क्योंकि यही वीरता की निशानी है। समस्या से भागना कायरता है।
यह बात परम पूज्य प्रज्ञा निधि, युग पुरूष, आचार्य प्रवर, 1008 श्री विजयराज जी मसा ने कही। भाईदूज पर छोटू भाई बगीची मे आयोजित विशेष प्रवचन मे भगवान महावीर के निर्वाण के बाद उनके भाई -बहन का प्रसंग सुनाते हुए उन्होने कहा कि भगवान के निर्वाण से दुखी भाई को तब बहन ने सहारा देकर सभाला था और तीन दिन बाद भाई पारणा कराया था। समाज मे तभी से भाईदूज की परम्परा चली आ रही है। भगवान महावीर के भाई को बहन ने जो सहारा दिया वही परिवार की असली ताकत होती है। जिस परिवार मे प्रेम होता है, वही परिवार,परिवार कहलाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन है,तो समस्या भी रहेगी। कोई भी जीवन बिना समस्या से नही होता है। समस्या का सामना करना साहसिकता है, क्योंकि यह कार्य साहसी ही कर सकते है। यदि साहस ना हो, तो सहन करना चाहिए। सहन करना गंभीरता है, जो गंभीर व्यक्ति ही कर सकता है। समस्या के समाधान का कार्य चतुराई है। इसे चतुर व्यक्ति ही कर सकता है। समस्या से कभी दूर नही भागना चाहिए, क्योकि यह कार्य कायरता है जो सिर्फ कायर ही करते है। वीर हमेशा समस्या का सामना करने, सहन करने और समाधान करने की दिशा मे आगे बढ़ते है। भाई दूज का प्रसंग यह प्रेरणा दे रहा है।
उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनि जी मसा ने इससे पूर्व संयम के महत्व पर प्रकाश डाला| उन्होने आव्हान् किया कि संयमी जीवन नही तो श्रावक-श्राविका के रूप मे जीवन का निर्वाह पूर्ण ईमानदारी से करे | आरंभ मे महासती श्री इंदु प्रभाजी मसा ने संबोधित किया। उन्होने भाई-बहन के प्रेम कर प्रकाश डाला इस दौरान कई धर्मावलंबियों ने तपस्या के प्रत्याख्यांन लिए। प्रवचन मे कई श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।