



इंदौर महावीर भवन 21 नवंबर 2023 । प्राणी मात्रा में सद्भावना का संचार होना चाहिए विश्व के सभी धर्म का मुख्य सिद्धांत यही है धर्म का प्राण ही सद्भावना है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने जैन दिवाकर चौथमल जी की जयंती समारोह को संबोधित करते कहा कि सद्भावना के बिना की गई तीर्थ धाम यात्रा और धर्म उपासना कर्म बंधन का कारण ही बनती है। उन्होंने कहा कि दुर्भावना परमाणु बम से भी खतरनाक है बम तो बाहरी नुकसान करता है। लेकिन दुर्भावना सद्गुणों का नाश करती है। आत्मा जन्म जन्मांतर में भटकती है। मुनि कमलेश ने बताया कि खून का रंग कपड़ा खून से साफ नहीं होता वैसे ही दुर्भावना को दुर्भावना से तीन काल में समाप्त नहीं किया जा सकता सद्भावना के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। राष्ट्र संत ने बताया कि सद्भावना अपने आप में औषधि है आत्मा को निर्मल विचारों को पवित्र और शरीर निरोगी बनाया जा सकता है जैन संत ने कहा कि सद्भाव के बिना सच्ची शांति समृद्धि सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता, विश्व शांति नहीं आ सकती। सद्भावना अमृत है तो दुर्भावना जहर के समान है। चंदनबाला महिला मंडल की ओर से सप्त दिव सीय दिवाकर जयंती सकार्यक्रम के अंतर्गत 22 नवंबर को प्रातः 9:00 बजे धार्मिक तंबोले का आयोजन रखा गया है संघ के मंत्री रमेश भंडारी ने संचालन किया।