

पुण्य स्मरण दिवस पर विशेष
संक्षिप्त जीवन वृत
महासती श्री कमला वती जी का जन्म रतलाम (म. प्र.) में हुआ! पिता श्री निहाल चंद जी बोहरा व माता का नाम हगाम कुंवर! केवल छः वर्ष की आयु में अखण्ड यशधारी, आगम वेता आचार्य पुज्य श्री मन्ना लाल जी म.सा के सम्पर्क में आए व वैराग्य भाव जागृत हुए! भागवती दीक्षा
आपकी दीक्षा रामपुरा(म. प्र) में संवत 1992 की चेत्र शुक्ला एकम को सम्पन्न हुई! दीक्षा प्रदाता थे जैन दिवाकर गुरु देव श्री चौथमल जी म.सा. आपके दीक्षा प्रसंग पर कइ चारित्र आत्माए विधमान थी। आप ने अपनी मातुश्री हगाम कुंवर जी के साथ दीक्षा ग्रहण की! आप परम विदुषी महासती श्री साकर कुंवर जी( आचार्य श्री खुब चंद जी म.सा के सांसारिक पत्नी) की शिष्या बनी! उस ही दिन तपस्वी श्री लाभ चंद जी म. सा. एवम हीरा लाल जी म. सा( कानोड़ वाले) की दीक्षा हुई थी।
आपने गुरुणी जी के संग रह कर बहुत ज्ञान अर्जित किया । आपकी प्रवचन शैली बहुत ओजस्वी थी व दबंग स्वभाव के थे, आप को मालव सिंहनी की उपाधी से आपको पहचाना जाता है, आप संघ, सम्प्रदाय, गुरु परम्परा संबधी कोई भी बात होती उसका निर्भिकता पूर्वक उत्तर देते थे!
आपने कइ स्थानो पर स्थानक बनाने की प्रेरणा दी, साधार्मिक सहायता के लिये भी आप प्रयास करते रहते थे ।
आपने अपने 51 साल के संयम पर्याय में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तामिलनाडु, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि कई प्रान्तो में विचरण किया व धर्म प्रचार किया ।
आचार्य श्री खूब चंद जी म.सा, जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी म.सा के प्रति आपका पूर्ण समर्पण था । संवत 2043 की कार्तीक शुक्ला पूर्णिमा,16 नवम्बर1986 को आप का मेलापुर ( चेन्नई) में देवलोक गमन हुआ ।
आपकी प्रमुख शिष्याओं में दिवाकर दिपिका शान्ता कुवर जी म. सा., पुष्पा वती जी म. सा, तपस्वीनी सुगन कंवर जी म. सा, कुसुम वती जी म.सा. इन महासतीयों जी का देवलोक गमन हो गया! वर्तमान में आपकी शिष्याओ व प्रशिष्याओं का लगभग 35 महासती जी का परिवार है जो दिवाकर सम्प्रदाय में कमला ग्रुप के नाम से जाना जाता है! गुरु जैन दिवाकर पर समर्पित इन महासती वृन्द पर गुरु जैन दिवाकर की वाचना सन्पदा का प्रभाव नजर आता है! लगभग सभी महासती प्रवचन देने में ज्ञान सिखने व सिखाने में पारंगत है, तथा जिन शासन की महती प्रभावना करते हुए, गुरु नाम को महका रहे है!
प्रमुख शिष्याओं व प्रशिष्याओं में प्रमुख, प्रवर्तीनी डा. चंदना जी, तपस्वीनी कलावती जी, डा. अक्षय ज्योति जी, संथारा प्रेरिका उप प्रवर्तीनी श्री सत्य साधना जी, आगम ज्योति प्रिय साधना जी, दिव्य साधना जी तप चक्रेश्वरी महासती श्री अरुण प्रभा जी, महासती कुमुद लता जी, महासती महा प्रज्ञा जी, महासती संयम लता जी, आदि 35 महासतीजी है!
पुज्या महासती श्री कमला वती जी के दर्शन करने का कई बार सोभाग्य प्राप्त हुआ! जिनकी छवि आज भी मस्तिष्क पटल पर अंकित है, जिनका मेरी मातुश्री पर अत्यन्त स्नेह था! पुण्य स्मरण दिवस पर ह्रदय की असीम आस्था के साथ कोटिशः वंदन! आप जंहा भी विराजमान हो कृपा बरसती रहे।
विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा( पूणे)