सट्टे जुएं से कोई करोड़पति नहीं बना, बल्कि कई करोड़पति रोड़ पति बन गए-आचार्यश्री विजयराजजी महाराज

रतलाम,08 दिसंबर | शांति क्रांति संघ के आचार्यश्री विजयराजजी महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जल्दी पैसा, ज्यादा पैसा और किसी भी जरिए से पैसा आना चाहिए, इस सोच में लगी रहती है। यह सोच ही उसे जुएं और सट्टे के मार्ग तरफ धकेल देती है। हमें यह याद रखना चाहिए सट्टा युवा वर्ग को उद्देश्यहीन बना देता है। सट्टे से प्राप्त पैसा कभी स्थिर और स्थाई नहीं रहता।
रतलाम से खाचरौद तरफ विहार करते हुए मलवासा से भुवासा के बीच युवा वर्ग से धर्म चर्चा करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि सट्टे का पैसा पाप की बैंक होता है, जो कई पापों के रास्ते खोल देती है। गृहस्थों के लिए पैस कुछ-कुछ होता है, सब कुछ नहीं, जो पैसों को सब कुछ मानते हैं, वे घोर अज्ञान में होते है। एक दिन वे उन पैसों को छोड़ कर परलोक की यात्रा पर कूच कर जाते है। परलोक में वह पैसा साथ नहीं चलता, मगर पैसों से कमाये कर्म साथ जाते है। उनका फल वहां भी भोगना पड़ता है।
आचार्यश्री ने कहा कि सट्टे से प्राप्त मुफ्त के पैसों का लालच मनुष्य को जीते जी बर्बाद कर देता है। यह मन की शांति को और परिवार के सुख-चेन को छिन लेता है। सामाजिक इज्जत और प्रतिष्ठा को भी इससे धक्का लगता है। सट्टे में लगा मन कभी शांति से नहीं बैठता, वह तिकड़मबाजी में लगा रहता है। झूठ, छलकपट, धोखाधड़ी के पाप उसके लिए कोई मायने नहीं रखते, वह येनकेन प्रकारेण पैसे की हवस को पूरी करना चाहता है। पैसे का यह पागलपन उसके पतन का ही कारण बनता है। सट्टे-जुएं से कोई करोड़पति नहीं बना है, बल्कि कई करोड़पति रोड़ पति बन गए है।
आचार्यश्री ने कहा कि न्याय, नीति, ईमानदारी से कमाया गया पैसा सुख देता है, वह बरकत भी देता है। पुण्य की वृद्धि भी करता है। सट्टे का स्वभाव तो ऐसा है, जो एक बार थोड़ा पैसा कमा लेता है, वह बार-बार सट्टे में पैसा लगाता जाता है और खोता रहता है। सट्टे की पकड़ मजबूत होती जाती है, सट्टे से मिला पैसा स्थायित्व नहीं देता, वह मनुष्य के विवेक को छीनकर उसे स्पर्धा में लगाए रखता है। कल की आस में वह आज के सुख से वंचित हो जाता है। भारत की संस्कृति सट्टे की नहीं, यह पुरूषार्थ की संस्कृति है, पुरूषार्थ से प्राप्त धन ही सत्कर्म और सन्मति प्रदाता होता है।
खाचरौद नगर में प्रवेश संभावित
रतलाम में यशस्वी अभ्युदय वर्षावास सम्पन्न कर 9 दिसंबर शनिवार को सुबह जैनाचार्य श्री विजयराजजी मसा का खाचरौद नगर में प्रवेश संभावित है। आचार्यश्री के साथ में श्री रत्नेश मुनि, श्री युग प्रभ मुनि, श्री विश्वास मुनि, श्री वैराग्य प्रिय मुनि, श्री विशाल मुनि, और श्री नीरजप्रियजी और श्री नमनप्रियजी पहली बार खाचरौद पदार्पण हो रहा है।