ऐतिहासिक चार्तुमास के बाद रविवार को अंतिम प्रवचन एवं प्रथम विहार होगा
रतलाम, 09 दिसंबर। आज के दौर में अपने निंदकों को चुप करना आसान है लेकिन प्रशंसकों को चुप करने में हमारा पानी उतर जाता हैं। प्रशंसा में व्यक्ति बहक जाता है, महक जाता है और अपने आप को भूल जाता है। प्रशंसा में सावधान रहना चाहिए। प्रशंसा वह मदिरा है जो मुंह से नहीं कानों से पी जाती है। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में आयोजित प्रवचन में कही।
आचार्य श्री ने कहा कि हमारे पास जो शरीर, शक्ति और जो सुख है, इन तीनों का ठिकाना नहीं है। आज कल हम लोगों का शरीर इतना कमजोर हो गया है कि जरा सा गिर जाते है तो मोच आ जाती है, फ्रैक्चर हो जाता है। आप देखो शेर के पंजे में ताकत, मगर के मुंह में ताकत, श्वान के दांत में ताकत, हिरण के पैर में ताकत है लेकिन मनुष्य का पूरा शरीर कमजोर है। शरीर में ताकत नहीं, कोई शक्ति नहीं बची है। धर्म स्थल पर चार घंटे एक जैसे, एक स्थान पर नहीं बैठ सकते है।
आचार्य श्री ने कहा कि हमारे लिए सुख चार है लेकिन दुख हजार है। हम कहते है हमारे पास कार नहीं है, कार आने पर थोड़े सुखी हो जाते है और लोगो को बताते है। राइड पर निकले हादसे से बचे तो दुख हुआ, पुलिस ने चालान बनाया तो दुख, पड़ोसी ने गाड़ी मांगी तो दुख। हम न शक्ति में, न शरीर में और न सुख में आगे है। हमारे पास न ऐसा कोई घर, न कोई कार है, न कमाई है, न कपडे़ है। सुदेव मिले, सुगुरू मिले और सुधर्म मिले। आप चाहे जितने भी कु है लेकिन आप यदि सु से घिरे हुए है तो आप कु से सु हो जाएंगे।
ऐतिहासिक चार्तुमास के बाद रविवार को प्रथम विहार
रतलाम में ऐतिहासिक चार्तुमास के बाद 10 दिसंबर, रविवार को आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. का प्रथम विहार दोपहर 3.15 बजे होगा। इसके पूर्व सुबह सैलाना वालों की हवेली, मोहन टाकीज में विदाई समारोह एवं “रतलाम! तुझे सलाम” विषय परअंतिम प्रवचन होंगे। प्रवचन का समय प्रातः 9.15 से 11.30 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात आचार्य श्री दोपहर में सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन से प्रथम विहार करके जैन दिवाकर हास्पिटल, सागोद रोड पहुंचेंगे। 11 एवं 12 दिसंबर को उनकी बिबड़ौद जैन तीर्थ में स्थिरता रहेगी। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी ने इस अवसर पर धर्मालुजनो से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने का आव्हान किया है।