गुरूदेव जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा.बड़े महान, जिनशासन की बढ़ाई खूब शान

पूज्य रविन्द्रमुनिजी नीरज म.सा. के सानिध्य में दिवाकर धाम में मनाई दीक्षा जयंति

भीलवाड़ा । असहाय मानव की सहायता व जीवदया के प्रेरक, गुणों के सागर, जगत वल्लभ, करूणानिधान, प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरूदेव जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के गुणों का जितना गुणानुवाद किया जाए वह कम होगा। उन्होंने भगवान महावीर के जियो ओर जीने दो का संदेश जन-जन तक पहुंचाते हुए जिनशासन की शान बढ़ाई ओर हिसां प्रवृतियों में लीन रहने वालों को भी प्रेरणा देकर अहिंसक बनाया। ऐसे महान गुरू का जीवन सदा हमारा पथ प्रदर्शक रहेगा। ये विचार पूज्य संत रविन्द्रमुनिजी ‘नीरज’ ने रविवार को शहर में अजमेर रोड स्थित दिवाकर धाम परिसर में जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के दीक्षा जयंति के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रवचन से पूर्व एक घंटे नवकार महामंत्र एवं भक्तामर स्रोत का जाप हुआ। पूज्य रविन्द्रमुनिजी ने कहा कि जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के जीवन में कई ऐसे प्रसंग है जो आज भी जिनशासन की महिमा को प्रस्तुत करते है ओर ये बताते है कि धर्म के प्रति सच्चे आस्थावान श्रावक-श्राविका का हर संकट अवश्य दूर हो जाता है। धर्मसभा में सुश्रावक प्रकाशचन्द्र बाबेल (ब्यावर वाले) ने भजन के माध्यम से जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त किए। सभा में जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाड़जी मेहता, यश सिद्ध स्वाध्याय भवन के मंत्री मुकेश डांगी, सुश्रावक लक्ष्मीलाल कुकड़ा, अरविन्द झामड़, शकुन्तला बोहरा आदि ने भी गुरूदेव के प्रति आस्था व श्रद्धा का इजहार करते हुए गुणानुवाद किया। अहिंसा भवन शास्त्रीनगर के मंत्री दिनेश मेहता ने पूज्य रविन्द्रमुनिजी से होली चातुर्मास की विनती की। धर्मसभा में शांतिभवन श्रीसंघ के मंत्री सुशीलकुमार चपलोत, अहिंसा भवन श्रीसंघ के अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह बाबेल, अशोक पोखरना, हेमंत आंचलिया, दिवाकर धाम के अध्यक्ष सुरेन्द्र मेहता, गौतम लब्धि कलश के अध्यक्ष अनिल दासोत, विनोद चौधरी, प्रवीण कोठारी, सुरेश सुराणा सहित कई श्रीसंघों के प्रतिनिधि व श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा के बाद श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद का लाभ लिया।
नवकार महामंत्र एवं भक्तामर स्रोत जाप का आयोजन
गुरूदेव जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. की दीक्षा जयंति के उपलक्ष्य में प्रवचन से पूर्व सुबह 10 से 11 बजे तक नवकार महामंत्र का जाप एवं भक्तामर स्रोत का जाप किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। जाप के माध्यम से सर्व सुख-शांति, प्राणी मात्र के कल्याण की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने गुरूदेव के दिखाए मार्ग पर चलते हुए जिनशासन की सेवा एवं धर्म प्रभावना का संकल्प लिया।