जावरा (अभय सुराणा) । मानव जीवन अनमोल है अनेकों भवो मैं यह आत्मा भ्रमण करने के बाद मानव जन्म को प्राप्त करती है यह आत्मा नरक गति त्रिज्या गति देवगती मैं अने को बार जन्म मरण कर चुकी है पुण्य उदय होने पर ही मानव भव एवं उत्तम कुल प्राप्त होता है और यदि इसे भी हमने यूं ही गवा दिया तो फिर से हमें नरक गति या तियचगति में जाना पड़ेगा । ज्ञानी जैन फरमाते हे की यदि इस जन्म में धर्म नहीं किया पुण्य की कमाई नहीं किया तो फिर भवभव पछताना पड़ेगा प्रभु महावीर ने अपनी देशना में फरमाया कि बिना मानव जन्म के मोक्ष नहीं हो सकता । इसलिए हमें अपनी आत्मा के स्वरूप को समझना होगा । शरीर नाशवान है आत्मा अजर अमर शाश्वत है । आत्म दर्शन कर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ेंगे तो ही हमारा जीवन सार्थक होगा शाश्वत सुखों को प्राप्त करेगा । उक्त उद्बोधन उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी महाराज साहब ने दिवाकर भवन की धर्म सभा में फरमाए धर्म सभा को धैर्य मूनीजी महाराज साहब ने भी धर्म उपदेश दिया । आज की प्रभावना का लाभ पुखराज ललित कुमार पोखरना परिवार ने लिया । धर्म सभा का संचालन ललित भंडारी ने किया।