वंदना करने से पापों का नाश होता है – श्री पारस मुनी जी म. सा.

जावरा (अभय सुराणा)। मानव जीवन सार्थक करने के लिए मिला है सौभाग्य से जिनवाणी सुनने का सुंदर मौका मिला है। हम अपनी आत्मा का स्मरण करें स्मरण क्यों करें क्योंकि हम भूल गए हैं की आत्मा भी है हम शरीर के ऊपर ध्यान दे रहे हैं शरीर नाशवान है आत्मा अजर अमर शाश्वत है हमें ज्ञान दर्शन चारित्र की आराधना कर इस मानव भव को सार्थक करना है। प्रभु महावीर ने अपनी देशना में फरमाया कि मानव निष्काम भाव से प्रभु को वंदन करता है अरिहंत सिद्ध परमात्मा को वंदन करता है नमस्कार महामंत्र के पाच पदों को वंदन करता है तो वह उच्च से उच्च पुण्य का उपार्जन कर लेता है। वंदना करने से पापों का नाश होता है वंदना निष्काम भाव से हो उसमें किसी प्रकार का लोभ न हो कि मेरा अमुक कार्य पूरा हो जाएगा ऐसा कोई भाव नहीं आना चाहिए। प्रभु के बताए हुए मार्ग का मानव यदि पालन करता है तो उसकी आत्मा एक ना एक दिन पुण्य आत्मा बन जाती है। उक्त धर्म उपदेश साधु श्रेष्ठ श्री पारस मुनी जी महाराज साहब ने दिवाकर भवन की धर्म सभा में फरमाए धर्म सभा को उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनि जी मा साहब एवं श्री धैर्य मुनि जी महाराज साहब ने भी प्रवचन फरमाए आज की धर्म सभा का संचालन ललित भंडारी ने किया।