लोक भाषा हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की परिचायक है – श्रीमति बदेका

जावरा (अभय सुराणा) । लोक भाषा हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की परिचायक है लोक भाषा में ही रीति रिवाज विश्वास परंपराएं संस्कृति उत्सव त्यौहार समाहित है हमारे मालवी भाषा भी समृद्ध भाषा है किंतु वर्तमान में मालवी भाषा उपेक्षित है हमें मालवी भाषा को अधिक से अधिक व्यवहार में लाने की आवश्यकता है । उ क्त विचार युवा अभिव्यक्ति मंच द्वारा मालवी साहित्यकार माया मालवेंद्र बदेका को मालवी साहित्य गौरव सम्मान दिए जाने के अवसर पर माया मालवेंद्र बदेका ने व्यक्त किये। श्री मति बदेका जावरा की बेटी है। जिन्हे मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा मालवी लेखन पर संत पीपा पुरुस्कार प्रदान किया गया। सम्मान के अवसर पर नगर के साहित्यकार रमेश मनोहरा, राजेंद्र श्रोत्रीय, मनोहर मधुकर उषा श्रोत्रिय मोहन सैनी ने शाल श्री फल मोमोंटो से सम्मान किया।