अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी संपन्न

साहित्यकार व कवि डॉ प्रकाश उपाध्याय के निवास पर

जावरा (अभय सुराणा)अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रांत की जावरा इकाई द्वारा नव संवत्सर पर आयोजित व्याख्यान एवं मासिक गोष्ठी अवसर पर बही काव्य की रसधार ।
उक्त आयोजन की अध्यक्षता कर रहे नागदा के वरिष्ठ कवि श्री सुंदरलाल जोशी ‘सूरज’ ने नवसंवत्सर की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा- गुड़ी पड़वा हिन्दुओं का मुख्य त्योहार है। ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी।शक संवत् एवं नवरात्रि का आरंभ आज के दिन ही हुआ था। भास्कराचार्य ने इसी दिन पंचांग की रचना की थी।
इस दिन नीम के पत्ते मिश्री के साथ खाएं जातें हैं। अर्थात कड़वा खा कर मीठा बोलें। इस मिश्रण से पेट के रोग भी दूर होते हैं।
साथ ही अपनी ओज पूर्ण रचना
सात फीट छ:इंची राणा,जब मुगलों से लड़ता था।
ऐसा लगता भीम स्वयं ही, युद्ध क्षेत्र में बढ़ता था।
दो तलवारें रखता राणा, नि:शस्त्र पर करें न वार।
असी अपनी देता उसको,कहता अब चला तलवार।।
सुनाकर श्रोताओं में जोश का संचार किया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर सी एम मेहता साहेब ने इस तरह के सृजनात्मक आयोजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुई अपनी रचना बांचना ,जागना ,भागना और नापना सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवम दीप प्रज्वलित कर किया । गीतकार मनोहर मधुकर से सु मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।
साहित्य परिषद के अध्यक्ष एवम आयोजक डॉ प्रकाश उपाध्याय ने अपने सुमधुर गीतों
धीरे-धीरे मन का मेरे शैल शिखर जब पिघलता है एवम शिप्रा किनारे से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया ।
खाचरोद से पधारी विशेष अतिथि कवियित्री सीलेश तिवारी ने अपनी रचना से नारी शक्ति में नव ऊर्जा का संचार किया ।
महावर वाले पैरों को सीमा तक मोड सकती हूं
जोड़कर देश से रिश्ता हर रिश्ता तोड़ सकती हूं
मेहंदी वाले हाथों से मैं हथियार उठा लूंगी
चुनरिया छोड़कर के मैं तिरंगा ओढ़ सकती हूं ।
हिंदी के सुकवि राकेश मिश्रा ने अपनी कविता
जग छोडे पर हे जगजननी साथ ना छोड़े कविताएं
से काव्य यज्ञ में अपनी आहुति दी ।
नागदा के कवि अशोक गौरव ने
जितना भी हो सके निभाने की बात करना
जो रूठे हुवे हैं उनको मनाने की बात करना
और हरचरण सिंह चावला ‘चंचल’ ने
कितना मुश्किल है यहां अपनों की पहचान
दोनों झूठे है यहां
आंसू और मुस्कान ।
सुनाकर श्रोताओं से खूब दाद बटोरी ।
मशहूर शायर फजल हयात ने सुनाया
समंदर की भंवर से आज लड़के
निकल आया हूं तिनका पकड़ के
इसी की बांह में सोना है एक दिन
जमीं पे किस लिए चलना अकड़ के ।
शहर की मालवी मिठास चारू शोत्रिय एवम लक्ष्मी जोशी ने भी अपनी रचनाओं से प्रशंसा पाई।
वरिष्ठ कवि रमेश मनोहरा ने अपने व्यंग्य बाणों से श्रोताओं को घायल किया ।
सफल गोष्ठी को प्रो पालीवाल ,बाबूलाल नाहर , एडवोकेट आई पी त्रिवेदी ,सुरेश मेहता ,कनकमल कांठेड़,अनिल पावेचा ,राम चचलानी ,अभय श्रीवास्तव ,दिलीप सेठिया आदि ने अपनी उपस्थिति से गरिमा प्रदान की । अंत में आभार डॉ ज्योति उपाध्याय ने माना ।