नवीन शिक्षा निति चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास का आधार -श्री मेहता

जावरा (अभय सुराणा) । नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास होगा एवं विद्यार्थियों के जीवन के सभी पक्षों और क्षमताओं का संतुलित विकास करने मे सहायक होगी। भारतीय चिंतन परंपरा में चरित्र निर्माण और समग्र व्यक्तित्व विकास को शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है परन्तु वर्तमान युग में चरित्र निर्माण और समग्र विकास व्यक्तित्व विकास की क्षमता बंद हो गई हे। नवीन शिक्षा निति नीति का उद्देश्य अच्छे नागरिक ऑन का निर्माण करना और राष्ट्र निर्माण कार्य में व्यवहार एवं बौद्धिकता से भारतीय बने इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृति एवं मूल्यों का समावेश किया गया है ।
उपरोक्त विचार समग्र मालवा द्वारा आयोजित मालवा विचार मंथन कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए डॉ.सी .एम. मेहता द्वारा व्यक्त किए गए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिपेक्ष में व्यक्तित्व निर्माण एवं चरित्र निर्माण विषय पर बोलते हुए डॉक्टर मेहता ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में यदि आप किसी को भी प्रभावित करना चाहते हैं तो बेहतर प्रदर्शन करना होगा इसीलिए आपको किसी को भी प्रभावित करने की कला आनी चाहिए यह तभी संभव है जब आपके अंदर श्रेष्ठ गुणो का समावेश हो यह श्रेष्ठ गुण संतुलित एवं स्वच्छ शरीर उत्तम विचार और आत्मविश्वास से ही संभव है। आपने अपने उद्बोधन में कहा कि विचारों और सतर्कता की एकरूपता ही चरित्र चरित्र है ।चरित्र शब्द मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रकट करता है। अपने को पहचानो शब्द का यही अर्थ है जो अपने चरित्र को पहचान हमारा चा हमारा चरित्र ही हमारे आध्यात्मिक विकास का दर्पण होता है जो हमें आध्यात्मिक से जोड़कर आंतरिक ज्ञान से अवगत कराता है चरित्र एवं व्यक्तित्व के एक दूसरे के पूरक हे जो व्यक्ति का संपूर्ण स्वभाव अथवा चरित्र ही व्यक्तित्व कहलाता है।
श्री मेहता ने कहां कि भारतीय चिंतन परंपरा में व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण स्थान है। आज के समय में विद्यार्थियों में श्रेष्ठ गुना का समावेश होना चाहिए इन गुणों में संतुलन उत्तम विचार एवं आत्मविश्वास, ऐसे गुण है जो चरित्र निर्माण करते हैं ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के एक हाथ में ज्ञान और कौशल रखा है वहीं दूसरे हाथ में चरित्र और आचरणहे । शिक्षा का मुख्य उद्देश्य पुराने ज्ञान को आगे बढ़ाने, नए ज्ञान के सर्जन के साथ विद्यार्थियों को समसामयिक चुनौती के लिए बौद्धिक तौर पर तैयार करना है ।जो इस नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से क्रियान्वित हो रहा है आपने कहा कि स्वतंत्र भारत की प्रथम शिक्षा नीति 1968 दूसरी 1986 तथा 34 वर्षों पश्चात ऐतिहासिक बदलाव के साथ नवीन भारतीय शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बनाई गई है यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधारित है आपने कहा कि अब शिक्षा नीति में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक बदलाव करते हुए 5 + 3 + 3 + 4 वर्षों की शिक्षा को विस्तार से समझाते हुए अनेक प्रावधानों के बारे में बताया अभी यह नीति पूर्णत लागू नहीं हुई है कुछ प्रावधानों को ही लागू किया गया है मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसे लागू कर दिया गया है।
श्री राम विद्या मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय वैचारिक अनुष्ठान के चतुर्थ दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जीनियस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य एवं भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष राजेश शर्मा ने की। अतिथियों द्वारा सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया गया अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष अभय कोठारी ,समग्र मालवा संयोजक मनोहर सिंह चौहान, आयोजन समिति के अध्यक्ष जगदीश उपमन्यु, रमेश मनोहरा, महासचिव महेश शर्मा, अभय कांठेड़, आदि ने किया ।स्वागत भाषण अभय कोठारी, सरस्वती वंदना मनोहर सिंह चौहान, अतिथि परिचय एवं कार्यक्रम संचालन संजय श्रीवास्तव तथा आभार प्रदर्शन जगदीश उपमन्यु ने व्यक्त किया। अंत में अतिथियों को संस्था पदाधिकारी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

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