योग भारतीय ऋषि परंपरा की अनमोल देन है

रतलाम । योग केवल व्यायाम की एक विधि नहीं है अथवा ध्यान लगाने का ना ही कोई उपक्रम है अपितु यह  मनुष्य की संपूर्ण गतिविधियों का केंद्र है । मानव की समूची ऊर्जा का शक्ति केंद्र है । जिसे नियंत्रित और सही तरीके से संचालन योग के द्वारा किया जाता है । जिसका सर्वप्रथम प्रयोग हमारी सनातन सभ्यता के पथ प्रदर्शक ऋषि मुनियों द्वारा किया गया है और आज भी योग की महत्ता और अनिवार्यता बरकरार है ।
उक्त वक्तव्य अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर कॉलेज ग्राउंड स्थित बास्केटबॉल ग्राउंड पर संस्था परस्पर द्वारा आयोजित योग शिविर में उपस्थित योग प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए योग आचार्य के.बी.व्यास ने व्यक्त किये । आपने कहा कि हमें तंदुरुस्त और स्वस्थ रहने के लिए योग के प्रति समर्पित रहना होगा । संस्था अध्यक्ष महेश अग्रवाल ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने पूरी दुनिया को योग दिवस के माध्यम से स्वस्थ और संस्कारित रहने का उपदेश दिया है ।
दिनेश शर्मा ने कहा कि हम अपनी दैनिक दिनचर्या को नियंत्रित संयमित रखने के लिए नियमित रूप से योग और ध्यान करें । योग हमें आंतरिक रूप से शक्तिशाली बनाता है । योग शिक्षक शैलेंद्र व्यास ने कहा कि निरोगी काया का एकमात्र उपाय योग है । योग हमें रोगों से दूर भगाता है । कार्यक्रम में श्री अभय सुराणा, महेश व्यास, निमिष व्यास, मनीष बोहरा, नीरज शुक्ला, चंदन राठौर, अभय लोढा, मिलन राखेचा, सोनू व्यास, ओम प्रकाश पोरवाल, दशरथ पोरवाल आदि उपस्थित थे ।

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