सीएमएचओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तक अभियान की मानिटरिंग की


रतलाम । बारिश के मौसम में जीवाणु संक्रमण के कारण डायरिया फैलने की आशंका रहती है। डायरिया पाचन से संबंधित एक बीमारी है जिसमें व्यक्ति को दस्त आना शुरू हो जाते हैं। डायरिया के संक्रमण से बच्चे की सुरक्षा के लिए सफाई और स्वच्छता रखें, अपने शिशु को पहले छह माह तक प्रत्येक स्थिति में स्तनपान जारी रखें । स्वच्छ पानी पियें, बच्चों को विटामिन ए की खुराक नौ माह की आयु से 5 वर्ष तक 6 माह के अन्तराल पर अवश्य पिलाएं। लो आसमोलेरिटी ओआरएस, जिंक, मां का दूध और ऊपरी आहार देना जारी रखें । रोटावायरस से बचाव के लिए अपने शिशु का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं।
रतलाम जिले में दस्त रोग से बचाव के लिए स्टाप डायरिया कैम्पेन सहदस्तक अभियान का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा, एएनएम, आंगनवाडी कार्यकर्ता शून्य से पांच वर्ष आयु समूह के घरों में जाकर हाथों की धुलाई, ओआरएस बनाने की विधि का परामर्श एवं दस्त रोग से पीडित बच्चों को ओआरएस तथा 14 दिन तक जिंक की गोलियां प्रदान कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. आनन्द चंदेलकर द्वारा पलसोडी, राजापुरा माताजी, बाजना तथा शिवगढ क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण किया गया।
डा. चंदेलकर द्वारा ओआरएस कार्नर एवं दस्तक अभियान के प्रचार प्रसार का निरीक्षण कर दस्तक अभियान के लिए सभी 11 गतिविधियां निर्धारित प्रोटोकाल अनुसार करने एवं परिवार में चर्चा के दौरान पूरा समय देने के लिए निर्देशित किया। राजापुरा माताजी में निरीक्षण के दौरान चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए। इस सम्बन्ध में कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने हेतु निर्देशित किया गया। भ्रमण के दौरान डा. गौरव बोरीवाल एवं अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
दस्तक अभियान की प्रमुख गतिविधियों के अंतर्गत समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन और रेफरल, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में शैशव और बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान प्रबंधन और रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान प्रबंधन और रेफरल, 6 माह से 5 वर्ष के बच्चों में गंभीर अनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, 9 माह से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विटामिन ए अनुपूरण, बाल्यकालीन दस्त रोग की पहचान एवं नियंत्रण हेतु ओआरएस एवं जिंक संबधी सामुदायिक जागरूकता एवं प्रत्येक घर में ओआरएस पहुचाना, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृद्वि विलंब की पहचान, समुचित शिशु एवं बाल आहर पूर्ति (स्तनपान व्यवहार) संबंधी समझाईश समुदाय को देना, एसएनसीयू एवं एनआरसी से छुट्टी प्राप्त बच्चों में बीमारी की स्क्रीनिंग एवं फालोअप को प्रोत्साहन, गृह भेंट के दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे हुए बच्चों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी लेना आदि गतिविधियां की जाएंगी।