अपने भविष्य का निर्माण आप स्वयं ही कर सकते हैं और कोई नहीं- गणिवर्य श्री कल्याणरत्न विजय जी म. सा.

रतलाम। श्रीमद् विजय तपोरत्न जी महाराजा के शिष्य रत्न युवा हृदय परिवर्तक गणिवर्य श्री कल्याणरत्न विजय जी म. सा. आराधना भवन श्री संघ में इस वर्ष चातुर्मास हेतु अपने विशाल परिवार (57 साधु एवं 26 साध्वी जी) के साथ रतलाम पधार चुके हैं। आपके रतलाम में विभिन्न क्षेत्रों जैन श्रीसंघ सज्जन मिल क्षेत्र, स्टेशन जैनश्री संघ, शांति नगर जैन श्रीसंघ, संत नगर जैन श्रीसंघ एवं दीनदयाल नगर पश्चात छोटू भाई की बगीची पर दो दिवसीय प्रवचन श्रृंखला में प्रवचन देते हुए आपने फरमाया कि हमें शांत होकर अपनी पांचो इंद्रियों को कंट्रोल में लेना चाहिए। चारों कषाय क्रोध, मान, माया एवं लोभ हमारे परिवार को बर्बाद कर देते हैं। लोभ आंतरिक भूख है एवं आत्म द्वेग हैं। क्रोध आत्मा की आग है।
आपने फ़रमाया कि मनुष्य जीवन अनमोल है एवं जो भी पाना है प्राप्त कर सकते हैं लेकिन आयु बहुत कम है, अगर इसे संभाल लोगे एवं सफल कर लोगे तो जीवन परफेक्ट हो जाएगा। अपने भविष्य का निर्माण आप स्वयं ही कर सकते हैं और कोई नहीं। इसके लिए जीवन में नीति नियम आवश्यक रूप से होना चाहिए। उसी से अपनी सुरक्षा है।
इस अवसर पर अशोक चोपड़ा, अरुण धामनोद वाला, विजय मेहता, शिवलाल बंबोरी, महेंद्र लालवानी, अंतिम लोढ़ा, विजय पितलिया, निखिल गांधी, राकेश सकलेचा, बाबू सकलेचा आदि बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।
आराधना भवन जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अशोक लुनिया एवं सचिव हिम्मत गेलड़ा ने बताया कि परम पूज्य गणिवर्य कल्याण रत्नविजय जी म.सा. 2 जुलाई मंगलवार को प्रातः 8:15 बजे छोटू भाई की बगीची से सामैया के साथ विहार कर मोहन टॉकीज पहुंचेंगे, जहां प्रातः 9 से 10:15 तक 2 जुलाई से 6 जुलाई तक लोभ विषय पर प्रवचन होंगे। इस पांच दिवसीय प्रवचन श्रृंखला का लाभ शांतिलाल लल्लूजी मेहता, मेहता क्लॉथ स्टोर द्वारा लिया गया है एवं समाजजन से धर्म लाभ लेने की विनती की है।

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