प.पू. गणिवर्य युवा हृदय परिवर्तक कल्याण रत्नविजय जी म. सा. का 58 साधु संत एवं 30 साध्वी जी भगवंत के साथ भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुआ

रतलाम 7 जुलाई । परम पूज्य गणिवर्य युवा हृदय परिवर्तक कल्याण रत्नविजय जी म. सा. का 58 साधु संत एवं 30 साध्वी जी भगवंत के साथ भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हनुमान रुंडी पर हुआ। उपरोक्त जानकारी देते हुए आराधना भवन जैन संघ अध्यक्ष अशोक लुनिया एवं सचिव हिम्मत गेलड़ा ने बताया कि पूज्य कल्याण रत्नविजय जी म. सा. की अगवानी के लिए बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं प्रातः 7:00 बजे से ही चातुर्मास सामैया प्रवेश के लाभार्थी कंचनबाई, सागरमल, आनंदीलाल, मनीष गुगलिया के किरण टॉकीज स्थित निवास स्थान पर पहुंचना शुरू हो गए, जहां गुगलिया परिवार की ओर से पूज्य गुरुदेव की भव्य अगवानी की गई। किरण टॉकीज से भव्य सामैया प्रारंभ हुआ। सबसे आगे युवक अश्व पर धर्म पताका लिए चल रहे थे। उसके पीछे परम पूज्य गच्छाधिधिपति श्रीमद् विजय रामचंद्र सुरिश्वर जी एवं पूज्य आचार्य देव बोधिरत्न सुरीश्वर जी महाराज साहब की तस्वीर सुसज्जित बग्गियों मेर विराजमान थी। उसके पीछे आराधना भवन के विभिन्न महिला मंडल की महिलाएं सर पर कलश लेकर चल रही थी सुमधुर बैड अपनी संगीत की धुन बजाते हुए चल रहा था। जगह-जगह गुरु भगवान की भक्तजनों द्वारा गहुली की गई वह आशीर्वाद प्राप्त किया गुरु जी हमारे आए हैं नई रोशनी लाए हैं के नारे लग रहे थे चंद्रवीर परिवार के युवा साथी भाव विभोर होकर नृत्य कर रहे थे। गुरु भगवंत की स्वागत यात्रा में देश भर से भक्तजन रतलाम पहुंचे कोयंबटूर सूरत मुंबई चेन्नई पुणे दिशा अहमदाबाद आदि स्थानों से सैकड़ो की संख्या में भक्त जनों ने रतलाम पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
स्वागत यात्रा में जैन समाज के विभिन्न संघो के के अध्यक्ष सचिव एवं पदाधिकारियों ने भी बड़ी संख्या में अपनी सहभागिता प्रदान की। सामैया किरण टॉकीज, धान मंडी, गणेश देवरी, बजाज खाना ,चांदनी चौक चौमुखीपुल होते हुए हनुमान रंडी पर पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गया। इस चातुर्मास के प्रमुख लाभार्थी का लाभ मातोश्री पिस्ता बाई कन्हैयालाल श्रीमाल आदेश्वर सेल्स एजेंसी ने प्राप्त किया। वही प्रथम गुरु पूजन का लाभ शांतिलाल निर्मल कुमार डॉ. आदर्श अनमोल कटकानी परिवार ने लिया।
प्रवचन मंडप का लाभ
सूरजमल, मुन्नालाल, राकेश, श्रेयांश सकलेचा परिवार द्वारा लिया गया। पूज्य गुरुदेव ने फरमाया कि स्वकेंद्रित बनकर प्रवचन सुनना चाहिए और आत्म बल को मजबूत कर जीवन जीना चाहिए एवं चारों कषाय क्रोध, मान, माया और लोभ को कंट्रोल करके, कम करके खत्म करने का प्रयास करना चाहिए एवं कभी भी गुणवान की ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। अन्यथा अपनी पुण्यवानी चली जाती है।
प्रवेश समारोह को सफल बनाने में आराधना भवन ट्रस्ट, आराधना भवन सेवा समिति, चंद्रवीर परिवार, आराधना भवन के सभी महिला मंडल का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर अशोक लुनिया, पप्पू मुंबई वाला, जीवन पितलिया, राजेंद्र लुनिया, राकेश सकलेचा, राजेश गांधी, विजय मेहता, विनोद मूणत, पारस मूणत, मुकेश गांधी, नरेंद्र घी वाला, संजय पारख, अमृत जैन, दीपक कटारिया, संजय भंडारी, राकेश मेंर , राजेश मेर, कांतिलाल चोपड़ा अशोक चोपड़ा प्रकाश मूणत, राज लुनिया, सुनील पारख, हेमंत गेलडा आदि सैकड़ो की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अमृत जैन एवं हिम्मत गेलड़ा द्वारा किया गया। पूज्य गुरुदेव के प्रतिदिन प्राप्त 9 से 10.15 तक हनुमान रुंडी पर प्रवचन होंगे।

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