भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा होना चाहिए- आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा.

रतलाम, 27 जुलाई। आज कितने लोग यह सोचते हैं कि हम सुखी हैं या दुखी। आप भले ही स्वयं को सुखी मानते हो,लेकिन भगवान आपको दुखी ही मानते हैं। जब आप एक अनजान व्यक्ति में श्रद्धा रखते हो, तो भगवान पर भी अटूट श्रद्धा रखनी चाहिए।
यह बात वर्धमान तपोनिधि पूज्य आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में आयोजित प्रवचन में कही। उन्होने कहा कि भगवान कहते हैं कि आप दुखी हैं, इसलिए उनके इन वचनों पर विश्वास है या नहीं। परमात्मा की यह बात सबको समझनी होगी। भगवान की सुनेंगे,तो ही निश्चित उनके मार्ग पर आगे बढ़ेंगे और संसार की हर चीज में आनंद की अनुभूति होगी।
गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कहा कि यदि सुख की कामना करते हैं तो प्रभु के बताए मार्ग पर चलना होगा, उससे अधिक सुख कहीं नहीं मिलेगा। यदि हम मानते हैं कि दुख कोई और देता है और सुख भी बाहर से मिलता है, तो ऐसा नहीं है। सुख बाहर तलाशने वालों से प्रभु भी दुखी होते हैं। क्योंकि सुख स्वयं में है। यदि हम प्रभु के बताए मार्ग पर चलेंगे तो मोक्ष की प्राप्ति होगी।
श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रावक, श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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