


रतलाम 28 जुलाई । खेरादी वास स्थिति नीम वाले उपाश्रय में चल रही प्रवचन श्रृंखला मे साध्वी श्री अनंत गुणा श्री म.सा. ने अपने मंगल प्रवचन में बताया कि धर्म के मूल को समझना है तो धर्म मूल को पकड़ना पड़ेगा डाल,पत्ते,तना आदि को पकड़ने से कोई फायदा नहीं है। जिनवाणी में बताया विनय: धर्म: मूल: धर्म के मूल को समझना है तो विनय से ही धर्म के मूल को समझा जा सकता है अहंकार, ईर्ष्या, कषाय अपने जीवन से निकलना होंगे। मान, बड़ाई,ईर्ष्या आपको झुकना नहीं देते। ज्ञानीजन कहते हैं अहंकार और संस्कार में फर्क किया है कि अहंकारी व्यक्ति दूसरों को झुकाने पर खुश होता है और संस्कारी व्यक्ति खुद झुक कर खुश होता है। इसलिए जीवन में अहंकार का त्याग जरूरी है।तप,त्याग और तपस्या अपनी आत्मा के लिए 24 घंटे में से आप 24 मिनट तो निकल ही सकते हो इसमें आपको प्रभु की आराधना करना चाहिए और जो कुछ भी करना है। जो झुकने के भाव रखते हैं उनको कैवल्य दर्शन मिलता है जब तक व्यक्ति चिंतन और मनन नहीं करता तब तक कुछ भी होने वाला नहीं है।जब तक आप झुकोगे नहीं आपको कुछ मिलने वाला नहीं है।धर्म को समझना है धर्म को के प्लेटफार्म पर उतरना है तो उसके लिए सबसे पहले झुकना पड़ेगा।किंतु आपके झुकाने की आदत नहीं है यही सबसे बड़ी समस्या है उक्त विचार रखें तत्पश्चात गुरु भक्ति संपन्न कर महामांगलिक की गई व्याख्यान के अंत में 11 जनों को पुरस्कृत किया गया । कल प्रातः व्याख्यान में भगवान शंखेश्वर पारसनाथ के बारे में बताया जाएगा।
सौ. वृ.त. त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति रतलाम के तत्वाधान में आयोजित मंगल प्रवचन में आज बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे।