शिव के मस्तक पर गंगा हमें विवेक रखना सिखाती हैं : साध्वी हेमलता

सुजापुर माताजी मंदिर पर जारी नौ दिवसीय श्रीराम कथा में तीसरे दिन हुआ शिव पावर्ती विवाह

जावरा (अभय सुराणा) । स्वयं भु आद्यशक्ति पीठ श्रीअम्बेमाता मंदिर पहाड़ी सुजापुर पर अठारहवा ज्ञान गंगा महोत्सव के तीसरे दिन श्री भारत माता सेवाश्रम न्यास अध्यक्षा पूज्य साध्वी हेमलता दीदी सरकार ने शिव विवाह प्रसंग महोत्सव मनाते हुए कहा कि शिव जी का चरित्र हमें सादगी से जीवन जीना सिखाता है। शिव मृत्यु के देवता है किंतु साधारण रहन सहन और उच्च विचार को दर्शाता हैं। शिवजी महान तब बने, जब छोटे लोगो को प्रोत्साहन देकर बारात में ले जाते हैं, अध्यात्म दृष्टि से शिव बारात पिछड़े समाज का प्रतीक हैं। जिन्हे कोई नहीं अपनाता उन्हें शिव बारात में ले जाते हंै। कामदेव को जलाकर विवाह करना भी सिखाता हैं, हमारा दांपत्य काम प्रेरित नही होकर श्रीराम प्रेरित होना चाहिए। सदा ही हमसे नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों साथ ले कर चलना चाहिए। शिव मस्तक पर गंगा हमे विवेक रखना सिखाती हंै। कंठ में विष क्रोध पर नियंत्रण सिखाता हैं, विवाह पवित्रता का प्रतीक हैं हमे भी पुन: उसी सादगी में जीने की आवश्यकता हंै, फिजूल खर्च से बचने की आवश्यकता हैं। बेटियों को कार की जगह संस्कार देने से दांपत्य जीवन सुखी रहेगा।

इन्होने लिया पौथी पूजन और आरती का लाभ

कथा के तीसरे दिन पौथी पूजन का लाभ पुनमचन्द्र राठौड़, भंवरसिंह सोलंकी तथा देवेन्द्र शर्मा ने लिया। सांयकाल आरती का लाभ धुलसिंह डोडिया (सुखेड़ा), ओमप्रकाश शर्मा (कालूखेड़ा), आईपी त्रिवेदी अभिभाषक (जावरा), राजेन्द्र गौड़ पटवारी (जावरा), गणेश सूर्यवंशी (जेठाना), सुभाष शर्मा (जावरा), यशवंत शर्मा (सुखेड़ा), ओमनारायण शर्मा, शंकरलाल प्रजापत (भाटखेड़ी), अम्बाराम पाटीदार (पंचेवा), सुरेश भट्ट (आक्यादेह) ने लिया। प्रसादी का लाभ लक्ष्मीनारायण जोशी पटवारी जावरा तथा मांगुसिंह चन्द्रावत ने लिया।