
- लेखक और गीतकार-पंडित अजय शर्मा
छोड़ो सब मनमुटाव के किस्से
खुशियां दे दो सबके हिस्से
जग में ऐसा कोई जीव नहीं है
गलतियां नहीं होती जिससे
माफ़ी नहीं होती बुरी बात
बस इतना सा रखना है याद
क्या लाए थे क्या ले जाओगे
मुझको बतलाओ अपने साथ
अब जो बीत गई सो बात गई बीती पर ना पछताओ तुम
और फिर से अपनाकर सबको गालों पर रंग लगाओ तुम
की तुम भी महको खुशियों से औरों को भी महकाओ तुम
और फिर से अपनाकर सबको गालों पर रंग लगाओ तुम
अरे भांग चढ़ाओ जश्न मनाओ
गावो फागुन गीत राग
अरे कमर हिलाओं ढोल बजाओ
धूल उड़ाओ नाच नाच।
तुम मारो पिचकारी सतरंगों वाली
साथ भीगा दो सबकी धोती और साड़ी
मीठा भी बांटो तुम केवल रंग ना छांटो
ओर पीला दो सबको अपने हाथों ताड़ी।।
जिस क्षण में तुम हो आज बस इसका लुफ्त उठाओ तुम
और फिर से अपनाकर सबको गालों पर रंग लगाओ तुम
की तुम भी महको खुशियों से औरों को भी महकाओ तुम
और फिर से अपनाकर सबको गालों पर रंग लगाओ तुम